संस्थान ने ऋतु की लय के साथ बनाया भक्तिभाव का संतुलन
तिलवाड़ा। बालोतरा शरद ऋतु की शीतल बयार अब मरुभूमि की हवाओं में घुल चुकी है। भोर देर से उजास लाती है और संध्या जल्दी उतर आती है।
इन्हीं परिवर्तित लयों के साथ श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा ने मंदिर आरती के समय में आवश्यक परिवर्तन किया है — ताकि भक्ति की लौ ऋतु के अनुरूप और भक्तों के अनुकूल बनी रहे।
परंपरा का विस्तार, सुविधा का सम्मान
संस्थान की परंपरा सदैव यह रही है कि मौसम बदलते ही आरती समय को पुनः संयोजित किया जाए। इस परंपरा का सम्मान करते हुए, कार्तिक शुक्ल पक्ष त्रयोदशी से नई समय-सारिणी लागू की गई है — जिससे भक्तजन अपनी दिनचर्या के अनुरूप आरती में सम्मिलित हो सकें और संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी व श्री राणी रूपादे जी के दर्शन लाभ का पुण्य प्राप्त कर सकें।
नवीन आरती समय
प्रातःकालीन मंगला आरती — प्रातः 06:00 बजे से वहीं संध्याकालीन आरती — संध्या 07:00 बजे से होगी।
नई व्यवस्था के साथ आरती का क्रम अब अधिक अनुशासित और भक्तिपूर्ण रूप में सम्पन्न होगा।
संस्थान सचिव का अभिवचन
संस्थान सचिव सुमेरसिंह वरिया ने बताया —“मंदिर का हर निर्णय भक्ति और व्यवस्था, दोनों की भावना से प्रेरित होता है। ऋतु बदलती है तो भक्ति का समय भी स्वाभाविक रूप से बदलता है।
संस्थान चाहता है कि प्रत्येक आरती में श्रद्धा, समय और अनुशासन तीनों का सुंदर संगम बना रहे।”
सेवक दल की तैयारियाँ
संस्थान के सेवापुजारी एवं सेवादल के सदस्य नई आरती समय-सारिणी के अनुसार अपनी सेवाएँ सुनिश्चित करेंगे। मंदिर परिसर में आरती का क्रम, दीप व्यवस्था और दर्शन व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने हेतु सभी तैयारी पूर्ण कर ली गई है।
भक्तजनों से आग्रह
संस्थान की ओर से समस्त श्रद्धालुओं से आग्रह है कि वे नवीन आरती समय का पालन करते हुए समय पर आरती में सम्मिलित होकर धर्म पुण्य लाभ लेवें।
संस्थान की मंगलकामना
संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी और श्री राणी रूपादे जी की असीम कृपा आप सभी भक्तों पर सदैव बनी रहे, सभी के जीवन में भक्ति, संतोष और शांति का प्रकाश फैले —इसी भाव के साथ श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ।
