Balotra: आसोतरा में पानी संकट पर फूटा गुस्सा, बुजुर्ग चढ़ा टंकी पर, प्रशासन को देना पड़ा लिखित आश्वासन

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बालोतरा जिले के आसोतरा गांव में पेयजल संकट ने आखिरकार ऐसा रूप ले लिया कि एक बुजुर्ग को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ना पड़ा। लंबे समय से पानी की किल्लत झेल रहे ग्रामीणों का सब्र सोमवार को टूट गया, जब गांव के एक बुजुर्ग व्यक्ति ने विरोध स्वरूप टंकी पर चढ़कर प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जताया।

जैसे ही घटना की जानकारी गांव में फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण टंकी के नीचे एकत्रित हो गए। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और प्रशासन के खिलाफ गुस्सा खुलकर सामने आने लगा। ग्रामीणों का कहना था कि वे महीनों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही।

दो घंटे चला समझाइश का दौर

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने पहले स्थिति को शांत करने की कोशिश की और फिर टंकी पर चढ़े बुजुर्ग को नीचे उतारने के लिए समझाइश शुरू की। करीब दो घंटे तक ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस, बातचीत और आश्वासन का सिलसिला चलता रहा।

ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक उन्हें लिखित में ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आखिरकार काफी मशक्कत के बाद बुजुर्ग को सुरक्षित नीचे उतारा गया। इस दौरान पुलिस और प्रशासन की टीम पूरी तरह सतर्क रही ताकि कोई अनहोनी न हो।

कई बार दी शिकायत, फिर भी नहीं हुआ समाधान

ग्रामीणों ने बताया कि पानी की समस्या कोई नई नहीं है। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत दी। इतना ही नहीं, जिला कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें 10 फरवरी तक समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था। तय समयसीमा गुजर जाने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। कई मोहल्लों में पानी की सप्लाई अनियमित है, तो कहीं बिल्कुल बंद है। लोगों को टैंकरों के भरोसे रहना पड़ रहा है या दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है।

रोजमर्रा का जीवन प्रभावित

आसोतरा में पानी की कमी ने सामान्य जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। महिलाओं को सुबह-सुबह कई किलोमीटर दूर जाकर पानी भरना पड़ रहा है। पशुओं के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा। स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर खेतों में काम करने वाले किसानों तक, हर वर्ग इस संकट से परेशान है।

ग्रामीणों का कहना है कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए बार-बार आंदोलन करना पड़ रहा है, जो बेहद दुखद है। उनका आरोप है कि समस्या की जड़ में पाइपलाइन की खराबी, जल स्रोतों की उपेक्षा और नियमित मॉनिटरिंग का अभाव है।

लिखित सहमति के बाद थमा आंदोलन

लगातार दबाव और विरोध के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर पेयजल समस्या के समाधान को लेकर लिखित सहमति दी। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि तय समयसीमा के भीतर आवश्यक तकनीकी सुधार और सप्लाई व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा।

लिखित आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

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