राजस्थान में हाल ही में बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में किए गए फेरबदल को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गहलोत ने इसे न केवल प्रशासनिक रूप से अव्यवहारिक बताया, बल्कि आमजन के हितों के खिलाफ उठाया गया कदम करार दिया है।
अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि 31 दिसंबर की मध्यरात्रि को आनन-फानन में किया गया यह फैसला राज्य सरकार का एक और “तुगलकी फरमान” है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी अहम प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव बिना किसी व्यापक विचार-विमर्श और जनसुनवाई के कैसे किया जा सकता है।
प्रशासनिक तर्कों पर उठाए सवाल
गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बायतु विधानसभा क्षेत्र को बाड़मेर जिले में और गुड़ामालानी-धोरीमन्ना क्षेत्र को बालोतरा जिले में शामिल करने का निर्णय किसी भी प्रशासनिक तर्क पर खरा नहीं उतरता। उनका कहना है कि इस बदलाव से स्थानीय लोगों की समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ेंगी।
विशेष रूप से गुड़ामालानी क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस फेरबदल के बाद वहां के लोगों के लिए जिला मुख्यालय की दूरी पहले से अधिक हो गई है। ऐसे में सरकारी कार्यालयों, न्यायिक कार्यों और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच और कठिन हो जाएगी, जो सीधे-सीधे आमजन के साथ अन्याय है।
परिसीमन और सियासी समीकरणों का आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह फैसला जनता की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि आगामी परिसीमन और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया प्रतीत होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार प्रशासनिक फैसलों का उपयोग राजनीतिक लाभ उठाने के लिए कर रही है।
गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में नए जिले इसलिए बनाए गए थे ताकि प्रशासन को जनता के नजदीक लाया जा सके, लोगों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े और सरकारी सेवाएं सुलभ हों। लेकिन मौजूदा सरकार इन उद्देश्यों को दरकिनार कर केवल राजनीतिक फायदे साधने में जुटी है।
‘जनभावनाओं की अनदेखी’ का आरोप
अशोक गहलोत ने यह भी कहा कि इस तरह के निर्णय लेने से पहले स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा जरूरी होती है। लेकिन सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जनभावनाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर आदेश जारी कर दिए गए, जिससे क्षेत्र में असंतोष फैल रहा है।
आधिकारिक आदेश से बदला जिला भूगोल
गौरतलब है कि सीमा निर्धारण पर पुनर्विचार के बाद सरकार ने 31 दिसंबर की रात आदेश जारी करते हुए बाड़मेर और बालोतरा जिलों का भूगोल एक बार फिर बदल दिया। इस आदेश के तहत बायतु विधानसभा क्षेत्र को बाड़मेर जिले में तथा गुड़ामालानी विधानसभा क्षेत्र को बालोतरा जिले में शामिल किया गया है। इस बदलाव के बाद दोनों जिलों की प्रशासनिक सीमाएं फिर से नए सिरे से तय हो गई हैं।
अशोक गहलोत ने अंत में स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस फैसले को जनविरोधी मानती है और इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है।
