जैसलमेर के मोहनगढ़ डबल मर्डर केस में पुलिस को बड़ी सफलता। हरियाणा से आरोपी गिरफ्तार, 600 किमी क्षेत्र में 500 CCTV फुटेज खंगाले गए।

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मोहनगढ़ डबल मर्डर केस में पुलिस को बड़ी सफलता

जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र में व्यापारी और उसके मुनीम की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। वारदात के चार दिन बाद पुलिस ने हरियाणा से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी जैसलमेर पुलिस की विशेष टीम (SIT) द्वारा की गई है, जिसने लगातार कई राज्यों में फैली जांच के बाद आरोपी को पकड़ने में सफलता हासिल की।

20 अक्टूबर की रात हुई इस सनसनीखेज हत्या के बाद से ही पूरे जैसलमेर जिले में दहशत और आक्रोश का माहौल था। मृतक व्यापारी की पहचान बीकानेर निवासी मदनलाल सारस्वत (45) और उनके मुनीम रेवंतराम के रूप में हुई थी। दोनों की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी और शव अगले दिन उनकी दुकान के बाहर खून से लथपथ अवस्था में मिले थे। वारदात के बाद बदमाश व्यापारी की ऑल्टो कार और नगदी लेकर फरार हो गए थे।

50 पुलिसकर्मियों की टीम, 600 किलोमीटर की तलाश और 500 CCTV फुटेज खंगाले

जैसलमेर पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे ने इस दोहरे हत्याकांड को चुनौती के रूप में लेते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। टीम का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रवीण कुमार को सौंपा गया। इस टीम में 50 से अधिक प्रशिक्षित पुलिसकर्मी शामिल थे।

टीम ने हत्या के बाद से लेकर आरोपी की गिरफ्तारी तक तकनीकी और खुफिया दोनों स्तरों पर लगातार काम किया।
जांच के दौरान पुलिस ने 600 किलोमीटर के दायरे में स्थित 500 से अधिक CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली।
हर वीडियो, हर टोल नाका, हर पेट्रोल पंप और हर ढाबे की फुटेज का विश्लेषण किया गया।

आखिरकार पुलिस को एक ढाबे के बाहर लगे कैमरे से महत्वपूर्ण सुराग मिला। फुटेज में व्यापारी की जैसी दिखने वाली सफेद ऑल्टो कार दिखाई दी। शुरुआती वीडियो धुंधला था, लेकिन तकनीकी विश्लेषण से पुष्टि हुई कि वह मदनलाल सारस्वत की ही गाड़ी थी।

गाड़ी की मूवमेंट से खुला सुराग, पेट्रोल पंप फुटेज ने खोला राज

पुलिस ने कार की मूवमेंट को ट्रैक किया तो पता चला कि वारदात के बाद वह गाड़ी जैसलमेर से हनुमानगढ़ दिशा में गई थी। रास्ते में कई टोल नाकों और पेट्रोल पंपों की फुटेज को एक साथ जोड़कर पुलिस ने घटनाक्रम का क्रम तैयार किया।

एक पेट्रोल पंप की फुटेज में एक युवक कार में पेट्रोल भरवाता नजर आया। जांच में उसकी पहचान गुरप्रीत सिंह, निवासी पंजाब के रूप में हुई। पुलिस ने उसके मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल्स और लोकेशन का तकनीकी विश्लेषण किया तो कई संदिग्ध संपर्क और स्थानों का खुलासा हुआ।

जांच में यह भी सामने आया कि गुरप्रीत वारदात से दो दिन पहले जैसलमेर में रुका था और उसी दौरान उसने एक नया मोबाइल सिम कार्ड खरीदा था, जो हत्या की रात तक सक्रिय पाया गया। यही साक्ष्य पुलिस की जांच में निर्णायक साबित हुआ।

हरियाणा के सिरसा से आरोपी गिरफ्तार, खून लगे कपड़े और लूटी गई कार बरामद

पुलिस को जब यह पता चला कि गुरप्रीत सिंह हरियाणा के सिरसा इलाके में छिपा हुआ है, तो SIT ने तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क किया।
दोनों टीमों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सिरसा में दबिश दी और गुरप्रीत को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को उसके पास से व्यापारी की लूटी हुई ऑल्टो कार, कुछ नगदी और खून से सने कपड़े बरामद हुए।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी से गहन पूछताछ शुरू कर दी है। शुरुआती पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।

पैसों के लेनदेन से जुड़ा विवाद, ठेकेदारी से उपजा तनाव

पुलिस की शुरुआती जांच और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हत्या की जड़ में पैसों का लेनदेन और कामकाज को लेकर विवाद था।
मृतक व्यापारी मदनलाल के घर और दुकान का निर्माण कार्य हाल ही में चल रहा था। जिन लोगों को उन्होंने यह काम सौंपा था, वे कथित रूप से पंजाब क्षेत्र के मजदूर और ठेकेदार थे।

बताया गया कि काम का एक हिस्सा पूरा हो चुका था, लेकिन व्यापारी उस कार्य से संतुष्ट नहीं था। उसने बीच में ही काम रुकवा दिया और कहा कि “काम वैसा नहीं हुआ जैसा अपेक्षित था।”
हालांकि, जितना काम किया गया था, उसके पैसे भी दे दिए गए थे, लेकिन ठेकेदार पूरी रकम की मांग कर रहे थे। इसी बात को लेकर व्यापारी और मजदूरों के बीच तीखे विवाद की स्थिति बन गई थी।

स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, हत्या से दो दिन पहले वे मजदूर मंडी में मदनलाल की दुकान पर आए थे और कहासुनी भी हुई थी।
इसके बाद 20 अक्टूबर की रात दोनों का शव मिला, और वही मजदूर तब से गायब हैं।

चार टीमें पड़ोसी राज्यों में भेजी गईं, स्थानीय संपर्कों की भी जांच

एसपी अभिषेक शिवहरे ने बताया कि गुरप्रीत की गिरफ्तारी के बाद बाकी दो आरोपियों की पहचान लगभग तय कर ली गई है।
हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
फिलहाल पुलिस की चार विशेष टीमें बीकानेर, श्रीगंगानगर, पंजाब और हरियाणा में लगातार दबिश दे रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जांच में यह भी देखा जा रहा है कि हत्या की साजिश कहां और कब रची गई थी, और क्या इसमें स्थानीय सहयोग भी शामिल था।
पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या आरोपी पहले से मदनलाल के कारोबार या व्यक्तिगत जीवन से जुड़े थे।

जल्द होगा पूरे षड्यंत्र का खुलासा” एसपी अभिषेक शिवहरे

एसपी शिवहरे ने बताया कि “गुरप्रीत से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच अभी जारी है। बाकी आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। हत्या के पीछे का पूरा षड्यंत्र जल्द सामने आ जाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि टीम ने इस केस को हल करने के लिए लगातार दिन-रात मेहनत की है, और यह गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी सफलता है।
जिले की सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को “एक संगठित अपराध” की तरह देख रही हैं, क्योंकि हत्या के बाद जिस तरीके से गाड़ी और पैसे लेकर आरोपी फरार हुए, वह पूर्व-नियोजित योजना का संकेत देता है।

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