दूषित पानी बना जानलेवा: 70 से ज्यादा भेड़-बकरियों की मौत, 100 से अधिक पशु बीमार, पशुपालकों में भारी आक्रोश

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बालोतरा। जिले के पचपदरा क्षेत्र के बागुंडी और खेमा बाबा नगर इलाके में दूषित पानी पीने से बड़ी संख्या में पशुओं की मौत का गंभीर मामला सामने आया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 70 से अधिक भेड़-बकरियों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 100 से ज्यादा पशु बीमार बताए जा रहे हैं। अचानक बड़ी संख्या में पशुओं के मरने की घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और पशुपालकों में भारी चिंता और आक्रोश का माहौल बन गया है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह घटना उस समय सामने आई जब पशुओं को बागुंडी–पचपदरा मुख्य जल पाइपलाइन से जुड़े एक वाल्व के पास पानी पिलाया गया। बताया जा रहा है कि जैसे ही पशुओं ने इस वाल्व से पानी पिया, कुछ ही मिनटों के भीतर उनकी हालत बिगड़ने लगी। कई पशु लड़खड़ाने लगे और देखते ही देखते जमीन पर गिर गए। कुछ ही समय में दर्जनों भेड़-बकरियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य पशु तड़पते हुए बीमार हो गए।

ग्रामीणों का कहना है कि 4 मार्च को दोपहर करीब 2 बजे पानी में किसी जहरीले पदार्थ के मिल जाने की आशंका है, जिसके कारण पशुओं की यह हालत हुई। पशुपालकों ने बताया कि पानी पीने के बाद पशुओं के मुंह से झाग निकलने लगे और वे बेहोश होकर गिरने लगे। इस घटना ने इलाके के पशुपालकों को झकझोर कर रख दिया है।

घटना में बागुंडी निवासी पोकरराम मेघवाल को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। उनकी 15 भेड़ और 19 बकरियों सहित कुल 34 पशुओं की मौत हो गई। वहीं खेमा बाबा नगर निवासी अमराराम जाट की लगभग 40 भेड़ों की मौत हो चुकी है और उनकी कई भेड़ें अभी भी गंभीर स्थिति में बताई जा रही हैं। इसके अलावा ग्वाला निवासी विशनाराम की दो गायों की भी इस घटना में मौत हो गई है।

मामले की जांच

पशुपालकों के अनुसार कई पशु अभी भी बेहोशी की हालत में पड़े हुए हैं और उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। गांव में जगह-जगह बीमार पशु दिखाई दे रहे हैं, जिनका लगातार उपचार किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पशुओं की अचानक बिगड़ी हालत को देखकर लोगों में घबराहट फैल गई और तुरंत प्रशासन को इसकी सूचना दी गई।

इस घटना से इलाके के पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि कई परिवार पूरी तरह पशुपालन पर निर्भर हैं और भेड़-बकरियां ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन हैं। इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की मौत से कई परिवार आर्थिक संकट में आ गए हैं।

ग्रामीणों और पशुपालकों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और प्रभावित पशुपालकों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने जल आपूर्ति व्यवस्था की भी जांच करवाने की मांग उठाई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।

घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल है। पशुपालक अपने मृत पशुओं को देखकर बेहद दुखी हैं और प्रशासन से जल्द राहत देने की उम्मीद कर रहे हैं।

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