जसोल | बालोतरा. श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल में माघ मास के शुक्ल पक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति एवं आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिला। प्रातःकाल से ही जसोलधाम में श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन बना रहा तथा दिनभर अत्यंत भीड़ रही। दूर-दराज़ क्षेत्रों से पधारे भक्तों ने श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाईसिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी एवं श्री काला-गौरा भैरूजी के मंदिरों में विधिवत पूजन-अर्चन कर दर्शन लाभ लिया एवं सुख-समृद्धि की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर मंदिर संस्थान द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुव्यवस्था हेतु समुचित प्रबंध किए गए। दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने हेतु व्यवस्थित लाइनिंग प्रणाली, सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम तथा सेवाभावी कार्यकर्ताओं की तैनाती की गई, जिससे दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। संस्थान की सुदृढ़ व्यवस्थाओं के कारण अत्यधिक भीड़ होने के बावजूद दर्शन व्यवस्था पूर्णतः व्यवस्थित एवं शांतिपूर्ण बनी रही।
माघ शुक्ल सप्तमी के पावन पर्व पर वृद्धजनों, महिलाओं, युवाओं, बच्चों तथा नवविवाहित जोड़ों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां जसोल के दरबार में शीश नवाकर दर्शन लाभ लिया। सम्पूर्ण परिसर भक्ति भाव, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दिया।
भोजन प्रसादी (अन्नपूर्णा प्रसादम्) का आयोजन
इस पावन अवसर पर अन्नपूर्णा प्रसादम् का भी भव्य आयोजन किया गया। भोजन प्रसादी के लाभार्थी रहे — दीपक चंदानी, जय लालवानी, ललित नेनवानी एवं लक्ष्मण लालवानी, निवासी बालोतरा। प्रतिष्ठानों — मां अम्बे टैक्सटाइल एजेंसी, बालोतरा एवं पर्ल क्रिएशन, बालोतरा द्वारा इस सेवा का लाभ लिया गया। लाभार्थी परिवार द्वारा समस्त मंदिरों में विधिवत भोग अर्पण कर श्रद्धापूर्वक भक्तों में भोजन प्रसादी का वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धर्म भाव के साथ प्रसाद ग्रहण किया।
कन्या पूजन का आयोजन
इस अवसर पर लाभार्थी परिवार द्वारा जसोल नगर पालिका क्षेत्र की सर्व समाज छत्तीशी कौम की कन्याओं का विधिवत पूजन भी किया गया। परंपरानुसार कन्याओं का सम्मानपूर्वक पूजन कर उन्हें आदर-सत्कार प्रदान किया गया तथा श्रद्धा एवं सामाजिक समरसता के भाव के साथ आशीर्वाद प्राप्त किया गया। इस आयोजन ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों से भी जोड़ते हुए विशेष गरिमा प्रदान की।
समग्र रूप से माघ शुक्ल सप्तमी का यह पावन पर्व जसोलधाम में भक्ति, सेवा, श्रद्धा एवं सामाजिक सौहार्द का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ।
