जैसलमेर बॉर्डर पर गूंजी देशभक्ति की दिवाली: महिला जवानों ने दीयों से जगमगाई सरहद, फुलझड़ियों संग दिया ‘हम हैं यहां’ का संदेश

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महिला जवानों ने दीयों से जगमगाई सरहद, फुलझड़ियों संग दिया ‘हम हैं यहां’ का संदेश

राजस्थान-पाकिस्तान सीमा पर इस बार की दिवाली कुछ अलग थी तनाव, ठंडी हवाएं, और रेत के बीच बसे बंकरों में देशभक्ति की ऐसी रौशनी फैली जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया। ऑपरेशन सिंदूर के बीच भी जैसलमेर की सरहद पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने त्योहार की खुशियां इस तरह मनाईं कि मानो सीमा का हर रेत कण तिरंगे में रंग गया हो।

जहां एक ओर देशभर में लोग अपने परिवारों संग दीपावली मना रहे थे, वहीं सरहद पर तैनात ये जवान चौकसी और देश की सुरक्षा में जुटे हुए थे। लेकिन इस चौकसी के बीच भी उन्होंने एक संदेश दिया “हम हैं यहां, ताकि आप सुरक्षित रह सकें।”

दीयों से रोशन हुई सरहद, जवानों ने दी देशभक्ति की मिसाल

दिवाली की रात जब सीमावर्ती गांवों में दीपकों की झिलमिल रोशनी बिखर रही थी, उसी वक्त जैसलमेर बॉर्डर के चौकियों पर भी जवानों ने दीयों और कैंडल से अंधेरे को मात दी। महिला जवानों ने गश्त के दौरान ही मिट्टी के दीये जलाए, पटाखे फोड़े और फुलझड़ियों से रात को रौशन किया।
तारबंदी के पास, जहां आमतौर पर सन्नाटा पसरा रहता है, वहां इस बार दीयों की कतारें जलीं। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था यह उस अटूट संकल्प का प्रतीक था जो हर भारतीय सैनिक अपने वतन की सुरक्षा के लिए निभाता है।

महिला जवानों ने बनाई रंगोली, मिठाइयों से बांटी खुशी

सरहद पर तैनात महिला जवानों ने अपने साथियों के लिए रंगोली बनाकर त्योहार का रंग और गहरा कर दिया। मिट्टी की खुशबू और बारूद की गंध के बीच रंग-बिरंगे रंगों से बनाई गई ये रंगोलियां बताती हैं कि जहां देश की रक्षा होती है, वहां भी संस्कृति की सांसें जिंदा रहती हैं।
जवानों ने मिठाइयां बांटीं, एक-दूसरे को गले लगाकर “भारत माता की जय” के नारे लगाए और उस क्षण सरहद भी मानो भावनाओं से भीग गई।

अधिकारियों ने कहा – “यहां सब एक परिवार हैं”

बॉर्डर पर गूंजी देशभक्ति की दिवाली

सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी सवाई सिंह ने बताया कि भले ही जवान अलग-अलग राज्यों से आते हैं, लेकिन सरहद पर वे एक परिवार की तरह रहते हैं। उन्होंने कहा,

“दिवाली का असली अर्थ यही है कि अंधकार पर प्रकाश की जीत हो। यहां हम सब मिलकर रोशनी फैलाते हैं ताकि किसी को अपने घर की कमी महसूस न हो।”

वहीं अधिकारी राजेश ने बताया कि यह उनकी सरहद पर पहली दिवाली थी, और इसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मनाना उनके लिए गर्व का क्षण था। उन्होंने कहा,

“जवानों के चेहरे पर जो जोश और समर्पण है, वह दिखाता है कि देश की रक्षा उनके लिए केवल ड्यूटी नहीं, बल्कि एक भावना है।”

“सरहद पर दीयों की रौशनी, देश के लिए संकल्प की लौ”

जवानों ने तारबंदी के पास कैंडल जलाकर देश को विश्वगुरु बनाने के प्रतीक के रूप में एकता और शांति का संदेश दिया। उनके हाथों में तिरंगा, हथियार और दीये थे एक ओर सुरक्षा का प्रतीक, तो दूसरी ओर आशा की रोशनी।
रात के सन्नाटे में जब “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारे गूंजे, तो लग रहा था जैसे रेत का हर कण राष्ट्रगान की धुन में झूम उठा हो।

ठंडी हवाओं में भी जोश कायम

जैसलमेर बॉर्डर की रातें हमेशा ठंडी और सन्नाटे भरी होती हैं, लेकिन इस दिवाली वहां ठंड से ज्यादा जवानों का उत्साह गर्म था।
जब आसमान में फुलझड़ियां चमकीं और दीयों की टिमटिमाहट रेत पर पड़ी, तो पूरा बॉर्डर मानो किसी पवित्र मंदिर की तरह जगमगाने लगा।
हर दीया उस सैनिक की आंखों की चमक बन गया जो अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर देश के हर घर की सुरक्षा का प्रहरी बना खड़ा था।

ऑपरेशन सिंदूर के बीच साहस और समर्पण की मिसाल

यह दिवाली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आई, जब बॉर्डर पर तनाव की स्थिति बनी हुई थी। कई संदिग्ध गतिविधियों के बाद सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और सख्त थी।
इसके बावजूद जवानों ने न केवल अपनी जिम्मेदारी निभाई, बल्कि देशवासियों को यह विश्वास भी दिलाया कि चाहे हालात कितने भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, भारत की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं।

सरहद की दिवाली – एक प्रेरणा, एक संदेश

इस दिवाली पर बॉर्डर से जो संदेश निकला, वह केवल सुरक्षा का नहीं, बल्कि आत्मबल और समर्पण का भी प्रतीक था।
हर दीये की लौ जैसे कह रही थी

“तुम घर में सुरक्षित हो क्योंकि हम सरहद पर जाग रहे हैं।”

जवानों की इस अनोखी दिवाली ने यह साबित कर दिया कि देशभक्ति केवल रणभूमि तक सीमित नहीं, बल्कि यह हर सांस में बसी भावना है जो हर भारतीय सैनिक को अलग बनाती है।

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