कल्याणपुर। मरुस्थलीय क्षेत्र की पहचान माने जाने वाले खेजड़ी के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का मामला कल्याणपुर क्षेत्र में सामने आने के बाद ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। कोरना से चादराई जाने वाली सड़क के किनारे अज्ञात लोगों द्वारा दर्जनों खेजड़ी के पेड़ काट दिए गए। जब सुबह ग्रामीणों की नजर कटे हुए पेड़ों पर पड़ी तो पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सड़क किनारे कई स्थानों पर पेड़ों को जड़ से काटा गया है, जबकि कुछ पेड़ों को बीच से आरी लगाकर गिराया गया। आसपास लकड़ियों के अवशेष और ताजा कटे तनों के निशान साफ दिखाई दे रहे थे, जिससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि यह कटाई रात के अंधेरे में की गई। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोग मौके पर एकत्र हो गए।
ग्रामीणों ने इस घटना को न केवल अवैध, बल्कि पर्यावरण के साथ गंभीर खिलवाड़ करार दिया है। उनका कहना है कि खेजड़ी का पेड़ मरुस्थलीय इलाकों में जीवनदायिनी भूमिका निभाता है। यह न केवल मिट्टी के कटाव को रोकता है, बल्कि पशुओं के लिए चारा, छाया और स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। किसानों के अनुसार खेजड़ी की मौजूदगी से खेतों की उर्वरता भी बनी रहती है और यह पेड़ सूखे हालात में भी हरा-भरा रहता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई तो क्षेत्र में हरियाली का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। कई ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में वन विभाग की टीम द्वारा विस्तृत सर्वे करवाया जाए और नुकसान का आकलन कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। प्रारंभिक स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पेड़ों की कटाई किसके निर्देश पर की गई और इसके पीछे क्या उद्देश्य था। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं सड़क विस्तार या किसी निजी स्वार्थ के चलते तो यह कदम नहीं उठाया गया।
पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों की शीघ्र पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। उन्होंने क्षेत्र में वृक्षारोपण अभियान चलाने और कटे हुए स्थानों पर पुनः खेजड़ी लगाने की भी मांग की है।
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की गंभीरता से जांच में जुटा है। वन विभाग और स्थानीय राजस्व अधिकारियों को संयुक्त रूप से रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और क्या दोषियों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जाता है।
