श्री रावल मल्लीनाथ जी के 708वें जन्मोत्सव पर तिलवाड़ा में भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन

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तिलवाड़ा। बालोतरा मालाणी के संस्थापक, मालाणी के महादेव, वीर योद्धा, महान संत एवं जनमानस की आस्था के केंद्र श्री रावल मल्लीनाथ जी के 708वें जन्मोत्सव के उपलक्ष में श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, थान मल्लीनाथ (तिलवाड़ा) में विविध धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ आयोजित किए गए। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण एवं उत्सव का विशेष माहौल रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल भव्य मंगला आरती से हुआ। इसके पश्चात मंदिर प्रांगण में वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अष्ट प्रकृति महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें विद्वान आचार्यों एवं पंडितों ने विधिवत आहुतियां अर्पित कर महायज्ञ सम्पन्न कराया। महायज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात परंपरा अनुसार ध्वजारोहण किया गया। 

कन्या भोजन

इस अवसर पर श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर थान मल्लीनाथ (तिलवाड़ा), श्री राणी रूपादे जी मंदिर पालिया (तिलवाड़ा) तथा श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर मालाजाल (तिलवाड़ा) में विशेष रूप से भोग अर्पित किया गया।

इसके पश्चात तिलवाड़ा, बोरावास एवं थान मल्लीनाथ ग्राम पंचायत की कन्याओं का विधिवत पूजन किया गया। कन्याओं को प्रसाद एवं दक्षिणा भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया तथा समस्त श्रद्धालुओं में महाप्रसादी का वितरण किया गया।

संध्या काल में मंदिर परिसर में भव्य संध्याकालीन आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तगण सम्मिलित हुए तथा धर्म लाभ प्राप्त किया।

हवन पूजन

इस अवसर पर श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान (तिलवाड़ा) के प्रबंध उपाध्यक्ष कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल ने महायज्ञ में विराजमान होकर समस्त भक्तों के जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना के साथ विशेष आहुतियां अर्पित कीं। महायज्ञ का संचालन आचार्य अभिषेक जोशी सहित विद्वान आचार्यों एवं पंडितों द्वारा वैदिक विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराया गया।

कार्यक्रम के दौरान पुष्कर से आए नगारची कलाकारों, घुड़ नृत्य कलाकारों, गैर नृत्य तथा स्थानीय दमामी कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं, जिससे पूरे आयोजन में लोक संस्कृति और धार्मिक परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिला। 

मालाणी क्षेत्र के प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में ध्वजारोहण कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल द्वारा किया गया।

इस अवसर पर कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल ने बताया कि श्री रावल मल्लीनाथ जी के जन्मोत्सव को मंदिर परिसर में मनाने की औपचारिक शुरुआत इस वर्ष प्रथम बार की गई है। आगामी वर्षों में इसे और अधिक भव्य एवं दिव्य स्वरूप में आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने मालाणी क्षेत्र सहित समस्त श्रद्धालुओं से अपने-अपने घरों एवं क्षेत्रों में भी इस पावन तिथि को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाने का आग्रह किया, ताकि अधिक से अधिक लोगों को श्री रावल मल्लीनाथ जी के जन्मोत्सव की तिथि के बारे में जानकारी हो सके।

पुजा अर्चना

उन्होंने बताया कि श्री रावल मल्लीनाथ जी मालाणी क्षेत्र के संस्थापक एवं सामाजिक समरसता के महान प्रतीक रहे हैं। उनके तथा श्री राणी रूपादे जी के भजनों में लगभग सात सौ वर्ष पूर्व समाज को सत्य, धर्म, सेवा और एकता के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया है।

श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी निजिया पंथ से जुड़े हुए थे। उनके गुरु उगमसी भाटी थे तथा उनके गुरु भाई मेघधारू जी थे। तिलवाड़ा का ऐतिहासिक मेला भी संत परंपरा से जुड़ा हुआ है, जिसका आयोजन सैकड़ों वर्ष पूर्व गुरु उगमसी भाटी के सानिध्य में संत समागम से हुआ था। उस समय मेवाड़ से महाराणा कुम्भा एवं उनकी राणी, गुजरात से जैसल-तोरल, बाबा रामदेवजी सहित उनके समय के अनेक समकालीन संत-महात्मा संत समागम में पधारे थे। इस पंथ की विशेषता निराकार उपासना की रही है।

उन्होंने बताया कि श्री रावल मल्लीनाथ जी के 25वें गादीपति श्री रावल किशन सिंह जी जसोल के मार्गदर्शन में विगत वर्षों से तिलवाड़ा मेले के ध्वजारोहण के दिन मंदिर परिसर में अष्ट प्रकृति महायज्ञ का आयोजन निरंतर किया जाता रहा है। वर्ष 2011 में सेवानिवृत्ति के पश्चात श्री रावल किशन सिंह जी जसोल द्वारा सत्य, धर्म और सेवा के मार्ग पर चलकर समाज के समक्ष एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। उनके मार्गदर्शन में इस क्षेत्र में धर्म की ध्वजा पुनः प्रतिष्ठित हुई है तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को नई ऊर्जा मिली है।

आगामी वर्ष श्री रावल मल्लीनाथ जी के 709वें जन्मोत्सव को और अधिक भव्यता एवं दिव्यता के साथ आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया गया। 

साथ ही यह विश्वास व्यक्त किया गया कि सक्षम संस्थान, जिसने गत वर्ष रामदेवरा में नेत्र कुंभ का सफल आयोजन किया था, उनके द्वारा आगामी वर्ष श्री रावल मल्लीनाथ जी के 709वें जन्मोत्सव के अवसर पर श्री मल्लीनाथ पशु मेला, तिलवाड़ा में भी नेत्र कुंभ के आयोजन हेतु आशा व्यक्त की गई है, जिससे क्षेत्र के जनमानस को लाभ मिल सकेगा और यह एक बड़ी सौगात सिद्ध होगा।

इस अवसर पर आचार्य अभिषेक जोशी ने कहा कि अष्ट प्रकृति महायज्ञ का मूल उद्देश्य मानव और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करना है। वेदों में प्रकृति, वृक्षों और पशुओं के संरक्षण का स्पष्ट संदेश दिया गया है। श्री रावल मल्लीनाथ जी ने भी अपने जीवन के माध्यम से वृक्ष संरक्षण, पशु संरक्षण और प्रकृति के सम्मान का संदेश दिया है। यदि मानव प्रकृति का अंधाधुंध दोहन करेगा तो प्रकृति भी विनाश का कारण बन सकती है। इसलिए मानव, प्रकृति, जल, वृक्षों, पशु-पक्षियों और समस्त जीवों के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को धर्म, संस्कृति और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करने का माध्यम बनते हैं।

इस दौरान श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा के समिति सदस्यगण, श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल के समिति सदस्यगण, मालाणी क्षेत्र के प्रबुद्धजन, श्री रावल मल्लीनाथ जी के वंशजों सहित सैकड़ों श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित रहे।

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