बालोतरा. जिले में लंबे समय से जारी औद्योगिक प्रदूषण को लेकर अब राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) ने सख्त रुख अपना लिया है। जयपुर स्थित बोर्ड मुख्यालय ने जिले में संचालित औद्योगिक इकाइयों की पर्यावरणीय अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आरएसपीसीबी के सदस्य सचिव कपिल चंद्रवाल ने गुरुवार को बालोतरा जिले की पर्यावरणीय स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने औद्योगिक इकाइयों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण मानकों के पालन में बरती जा रही लापरवाही पर गहरी नाराजगी जाहिर की और साफ कहा कि अनुपालन के बिना किसी भी प्रकार की प्रशासनिक राहत नहीं दी जाएगी।
ईटीपी इकाइयों पर सख्त निगरानी के निर्देश
मुख्यालय स्तर से बालोतरा के क्षेत्रीय अधिकारी (आरओ) दीपक तंवर को निर्देशित किया गया है कि जिले की सभी ईटीपी (एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) आधारित औद्योगिक इकाइयों में जारी आदेशों को तत्काल और प्रभावी रूप से सर्कुलेट किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी इकाइयां प्रदूषण नियंत्रण मानकों का अक्षरशः पालन करें।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब ईटीपी और जेडएलडी (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) से संबंधित लंबित सहमति आवेदन (कंसेंट टू ऑपरेट/कंसेंट टू एस्टैब्लिश) पर तभी विचार किया जाएगा, जब संबंधित इकाई द्वारा पूर्ण अनुपालन की पुष्टि का विधिवत सत्यापन हो जाएगा। बिना सत्यापित अनुपालन के किसी भी आवेदन पर आगे की प्रक्रिया नहीं की जाएगी।
28 फरवरी तक अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य
आरएसपीसीबी के निर्देशों के तहत बालोतरा जिले की वे सभी औद्योगिक इकाइयां, जिनके पास स्वयं की ईटीपी और जेडएलडी यूनिट स्थापित हैं, उन्हें आगामी 28 फरवरी तक अपनी विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट क्षेत्रीय कार्यालय बालोतरा में अनिवार्य रूप से जमा करानी होगी। इस रिपोर्ट में इकाइयों को यह स्पष्ट करना होगा कि वे किस प्रकार अपशिष्ट जल के शोधन, पुनः उपयोग और निस्तारण की प्रक्रिया का पालन कर रही हैं।
वहीं क्षेत्रीय अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी औद्योगिक इकाइयों पर सतत निगरानी रखें, जहां भी कमियां पाई जाएं उन्हें तत्काल दूर करवाएं और पूरे जिले की समेकित अनुपालन रिपोर्ट मार्च 2026 के पहले सप्ताह में आरएसपीसीबी मुख्यालय को भेजें।
जमीनी हकीकत: सड़कों पर बहता प्रदूषित पानी
हालांकि, कागजी सख्ती के बीच जमीनी हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। बालोतरा औद्योगिक क्षेत्र के चतुर्थ चरण में सीईटीपी की ओर जाने वाली औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला प्रदूषित पानी सड़कों पर फैल रहा है। नगर परिषद द्वारा नालों की नियमित सफाई नहीं किए जाने के कारण होदियों से काला और रासायनिक युक्त पानी बाहर आ रहा है।
इसके चलते कई स्थानों पर सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई है। स्थानीय नागरिकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुर्गंध, फिसलन और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
पर्यावरणीय निगरानी पर उठे सवाल
यह स्थिति न केवल नगर निकाय की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़े करती है कि जमीनी स्तर पर पर्यावरणीय निगरानी कितनी प्रभावी है। एक ओर बोर्ड मुख्यालय से सख्त आदेश जारी हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण खुलेआम सड़कों पर बहता नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन निर्देशों का सख्ती से पालन नहीं कराया गया, तो बालोतरा क्षेत्र में पर्यावरणीय संकट और गहराता जाएगा। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आरएसपीसीबी के ये आदेश धरातल पर कितनी प्रभावी कार्रवाई में बदलते हैं।
