जैसलमेर जिले में 14 अक्टूबर को हुई दर्दनाक बस दुर्घटना, जिसने पूरे राजस्थान को झकझोर दिया था, उसकी फॉरेंसिक रिपोर्ट (FSL रिपोर्ट) अब सामने आ चुकी है। इस रिपोर्ट में उस भीषण हादसे के पीछे की असली वजहों का खुलासा हुआ है और यह खुलासे न केवल तकनीकी लापरवाही की पोल खोलते हैं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चल रही ढिलाई पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
AC की वायरिंग में शॉर्ट सर्किट से लगी आग
रिपोर्ट के अनुसार, बस की छत पर लगा एयर कंडीशनर (AC) इंजन से सीधे जोड़ा गया था। यह कनेक्शन सुरक्षा मानकों के विपरीत था। फॉरेंसिक टीमों ने पाया कि इसी वायरिंग में शॉर्ट सर्किट हुआ, जिससे सबसे पहले छत के हिस्से में आग भड़की और कुछ ही मिनटों में पूरा केबिन धुएं से भर गया।
जैसलमेर पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे ने बताया कि FSL टीमों की संयुक्त जांच में यह स्पष्ट हुआ कि बस में किसी भी बाहरी विस्फोटक या ज्वलनशील पदार्थ की भूमिका नहीं थी। आग पूरी तरह तकनीकी खराबी और असुरक्षित वायरिंग की वजह से लगी थी।
धुएं और कार्बन मोनोऑक्साइड से यात्रियों का दम घुटा
रिपोर्ट के अनुसार, शॉर्ट सर्किट के बाद जब बस में धुआं फैलने लगा तो उसमें कार्बन मोनोऑक्साइड गैस भर गई थी।
ज्यादातर यात्रियों की मौत जलने से पहले ही दम घुटने की वजह से हुई।
जब बस में बैठे लोगों ने खिड़कियां तोड़ने की कोशिश की ताकि बाहर निकल सकें, तो बाहर से आई ऑक्सीजन ने आग को और भड़का दिया, जिससे कुछ ही सेकंड में पूरी बस आग की लपटों में घिर गई।
बस का निचला हिस्सा सुरक्षित, ऊपर से लगी आग
जोधपुर और जयपुर से आई FSL टीमों ने घटना के बाद 15 अक्टूबर को संयुक्त रूप से जांच की थी।
उन्होंने बस के इंजन, डीजल टैंक और नीचे के हिस्से की गहन जांच की, जो पूरी तरह सुरक्षित मिले। इसका अर्थ था कि आग नीचे से नहीं, बल्कि ऊपर से यानी AC यूनिट से फैली थी।
पटाखों या विस्फोटक तत्वों की नहीं मिली कोई भूमिका
बस की डिक्की में कुछ पटाखे जरूर मिले थे, लेकिन रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि वे पानी से पूरी तरह भीगे हुए थे और उनमें किसी तरह के विस्फोटक तत्व का कोई निशान नहीं मिला।
इससे यह सिद्ध हो गया कि हादसे में पटाखों या किसी बाहरी धमाके की कोई भूमिका नहीं थी।
26 जिंदगियों की लापरवाही से हुई मौत
इस हादसे में अब तक 26 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अधिकांश यात्री धुएं के कारण बेहोश हो गए थे और बाहर निकलने से पहले ही आग में झुलस गए।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बस की बॉडी में इस्तेमाल की गई सामग्री फायर-रेजिस्टेंट नहीं थी, यानी उसमें आग तेजी से फैल सकती थी।
FSL रिपोर्ट के बाद कार्रवाई तेज, तीन गिरफ्तार
पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर बस मालिक, ड्राइवर और बॉडी मेकर तीनों को गिरफ्तार किया है।
एसपी अभिषेक शिवहरे ने कहा बस निर्माण और फिटिंग के दौरान गंभीर तकनीकी लापरवाही बरती गई थी। AC वायरिंग को इंजन से जोड़ना पूरी तरह असुरक्षित था। अगर समय पर निरीक्षण किया गया होता, तो यह हादसा टाला जा सकता था।
