जसोलधाम मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी महोत्सव दिव्य आरती, रात्रि जागरण और आध्यात्मिक आस्था का अलौकिक वातावरण

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आस्था का सैलाब

जसोल। बालोतरा। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के पावन अवसर पर जसोलधाम में आस्था, भक्ति और धार्मिक परंपराओं का अत्यंत मनोहारी एवं दिव्य दृश्य देखने को मिला। प्रातःकालीन मंगल आरती की शुभ ध्वनि के साथ ही श्रद्धालुओं का आगमन आरंभ हुआ और संपूर्ण परिसर जयकारों, घंटियों तथा भजनों की सुरलहरियों से गुंजायमान हो उठा।

त्रयोदशी पर्व की आध्यात्मिक छटा को और अधिक भव्य स्वरूप प्रदान करने हेतु संपूर्ण मंदिर परिसर एवं पवित्र देवालयों को पुष्प-मालाओं से सुसज्जित किया गया। विभिन्न रंगों की आकर्षक विद्युत सजावट ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया। दिव्य ज्योति और पुष्प-सुगंध से पूरा परिसर अलौकिक आभा से अलौकिक रहा।

दर्शनार्थ पधारे भक्तों ने श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाई सिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी एवं श्री काला–गौरा भेरूजी के पावन देवालयों में विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। नवविवाहित दंपतियों ने अपने दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और सौहार्द की मंगलकामनाओं के साथ दर्शन लाभ अर्जित किया। मंदिर परिसर में धूप, दीप, पुष्प और भक्ति-संगीत की पावन सुगंध एवं मधुर स्वर निरंतर आध्यात्मिक शांति का संचार करते रहे।

भक्तों ने किये दर्शन

त्रयोदशी की पूर्व संध्या पर आयोजित रात्रि जागरण सम्पन्न हुआ, जिसने इस पावन पर्व की गरिमा को और उन्नत किया। स्थानीय भजनियों ने श्रद्धाभाव से पारंपरिक भक्ति-भजन प्रस्तुत किए, जिनकी सुरलहरियों ने पधारे हुए भक्तों को देर रात तक भक्ति-रस में भाव-विह्वल रखा।

त्रयोदशी के शुभ अवसर पर संध्या काल में दिव्य आरती का सीधा प्रसारण सम्पन्न हुआ, जिसके माध्यम से देश-विदेश में निवासरत श्रद्धालुओं ने अपने घरों से ही मां जसोल के दर्शन लाभ प्राप्त किए। लाइव आरती के पश्चात आयोजित विशेष रात्रि जागरण भव्य रूप से सम्पन्न हुआ, जिसमें स्थानीय भजनियों की सुरीली प्रस्तुतियों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया।

मंदिर संस्थान द्वारा की गई व्यवस्थाएं पारंपरिक मर्यादाओं के अनुरूप अत्यंत सुव्यवस्थित रहीं। सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ रखने हेतु परिसर में CCTV निगरानी प्रणाली सक्रिय रही तथा पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से आवश्यक निर्देश समय-समय पर प्रसारित किए गए। भीड़ प्रबंधन एवं दर्शन व्यवस्था सरल, सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संचालित हुई।

कन्या पूजन

प्रसाद अर्पण की परंपरागत व्यवस्था सुचारू रूप से निरंतर चालू रही। श्रद्धालुओं ने निर्धारित स्थानों पर श्रद्धापूर्वक प्रसाद अर्पित किया तथा पवित्र भाव से प्रसाद ग्रहण किया। पूरे परिसर में स्वच्छता, अनुशासन और दिव्यता का सुंदर समन्वय निरंतर दृष्टिगोचर हुआ।

इस त्रयोदशी पर्व पर भोजन प्रसादी (अन्नपूर्णा प्रसादम) का सौभाग्य नवनीत सिंह पुरोहित, पुत्र पी. डी. सिंह पुरोहित, निवासी–रियाँ बड़ी (जिला–नागौर) को प्राप्त हुआ। उन्होंने सभी मंदिरों में पूजा-अर्चना कर भोग अर्पित किया तथा जसोल सर्वसमाज छत्तीशी कौम की कन्याओं का विधिवत पूजन कर फल-प्रसाद, अन्न-प्रसाद और दक्षिणा अर्पित की। पूजन पश्चात श्रद्धालुओं को अन्नपूर्णा प्रसादम वितरित किया गया।

महोत्सव में सांस्कृतिक भक्ति-भजन की अनुपम छटा भी दृष्टिगोचर हुई। हड़वा बाड़मेर से आए मांगणियार कलाकारों ने अपनी पारंपरिक लोकधुनों से श्रद्धालुओं को भावविह्वल किया, वहीं पुष्कर से पधारे नगारची कलाकारों की ऊर्जामयी प्रस्तुतियों ने वातावरण को उल्लास, परंपरा और भक्ति से परिपूर्ण कर दिया। भक्ति एवं लोकसंगीत का यह मधुर संगम महोत्सव की विशेष शोभा बना रहा।

जसोलधाम सदैव आस्था, परंपरा और संस्कृति का पवित्र केंद्र रहा है। त्रयोदशी महोत्सव ने एक बार फिर सिद्ध किया कि जसोलधाम भक्ति, सेवा, संस्कृति, सामाजिक समरसता, सौहार्द एवं मानव-मूल्यों का प्रेरक और जीवंत तीर्थस्थल है। दिव्य आरती, रात्रि जागरण, अनुशासित व्यवस्था, भक्ति-भजन और श्रद्धालुओं की गहन आस्था — इन सभी ने मिलकर इस महोत्सव को अविस्मरणीय आध्यात्मिक उत्सव का दिव्य स्वरूप प्रदान किया।

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