धनतेरस पर रणछोड़ राय मंदिर में जगमगाएंगे लाखों दीप, प्रदेश का सबसे बड़ा दीपोत्सव का होगा आयोजन

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लाखों दीपों से बनाई लक्ष्मी माता, राम दरबार और श्रीराम मंदिर की झांकिया(फाइल फोटो)

पश्चिमी राजस्थान की पावन धरती, जिसे मारवाड़ का तीर्थराज कहा जाता है, इस धनतेरस एक बार फिर स्वर्णिम आभा से जगमगाने वाली है। श्री रणछोड़ राय भगवान मंदिर तीर्थ स्थल पर इस बार 1 लाख 11 हजार दीपों से महा दीपोत्सव मनाया जाएगा। यह आयोजन न केवल बालोतरा बल्कि पूरे प्रदेश में सनातन आस्था और संस्कृति के उजास का प्रतीक बनने जा रहा है।

तीर्थभूमि पर यह दीप महोत्सव लगातार चौथे वर्ष आयोजित किया जा रहा है। पहले वर्ष 11 हजार दीप, दूसरे वर्ष 31 हजार, और तीसरे वर्ष 1 लाख दीप प्रज्वलित किए गए थे। अब इस परंपरा को और विराट रूप देते हुए, इस वर्ष 18 अक्टूबर (धनतेरस) को 1 लाख 11 हजार दीपों का सामूहिक दीपोत्सव होगा। जो अयोध्या के बाद श्री रणछोड़ राय भगवान मंदिर तीर्थ स्थल पर राज्य का सबसे बड़ा दीपोत्सव मनाया जाएगा।

दीपों की झिलमिल रोशनी में दमकता अयोध्या श्रीराम मंदिर, (फाइल- फोटो)

संतों के सानिध्य में होगा भव्य आयोजन

आयोजन समिति के अनुसार, दीपोत्सव कार्यक्रम क्षेत्र के प्रमुख संत-महात्माओं के सानिध्य में संपन्न होगा। संत प्रवचन, भजन संध्या, सांस्कृतिक प्रस्तुति और दीप प्रज्वलन के साथ यह आयोजन सनातन संस्कृति के जीवंत दर्शन कराएगा। रणछोड़ राय भगवान की प्राचीन धरोहर भूमि पर यह आयोजन आस्था, एकता और संस्कृति के मिलन का अद्भुत संगम होगा।

कलात्मक दीप सज्जा में झलकेगी सनातन धरोहर

इस वर्ष दीपोत्सव का सबसे आकर्षक पहलू होगा – मिट्टी के स्वदेशी दीपों से बनाई गई कलाकृतियाँ और मानचित्र डिज़ाइन। आयोजन स्थल पर कई देवी-देवताओं की छवियाँ, धार्मिक प्रतीक चिन्ह, और भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों के नक्शे दीपों की रोशनी से उकेरे जाएंगे। आयोजक मंडल का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि सनातन परंपरा की कला, आस्था और स्वदेशी भावनाओं का उत्सव है।

महिला मंडल और युवा कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर

दीपोत्सव मंडली और ट्रस्ट सदस्यों ने तैयारी की कमान करीब एक माह पहले ही संभाल ली थी।
लगभग 50 सक्रिय कार्यकर्ता, 30 से अधिक बालिकाएँ, और महिला मंडल की सदस्याएँ दिन-रात सजावट, दीप निर्माण, और प्रचार-प्रसार में जुटी हुई हैं। तैयारियों की ऊर्जा देखते ही बनती है हर कार्यकर्ता इस आयोजन को “धर्म का दीप पर्व” बनाने के लिए समर्पित भाव से जुटा हुआ है।

शहर में व्यापक प्रचार, तीर्थभूमि पर सजीव तैयारियाँ

आयोजन की व्यापकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शहर के प्रमुख मार्गों पर बड़े-बड़े होर्डिंग्स, बैनर, और पोस्टर लगाए जा चुके हैं।
साथ ही, घर-घर पत्रक वितरण अभियान के जरिए हर नागरिक को इस भव्य आयोजन में शामिल होने का निमंत्रण दिया जा रहा है।
तीर्थ स्थल पर लाइटिंग, साज-सज्जा, मंच निर्माण, एवं सुरक्षा व्यवस्थाएँ जोरों पर हैं। मंडल सदस्यों का कहना है कि धनतेरस की शाम को जब पहला दीप जलेगा, तो रणछोड़ राय मंदिर परिसर स्वर्गिक आभा से नहा उठेगा।

भक्ति और पर्यटन दोनों का केंद्र बनेगा तीर्थ स्थल

दीपोत्सव न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। हर वर्ष की तरह इस बार भी राजस्थान के विभिन्न जिलों, गुजरात और मध्य प्रदेश से श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

ट्रस्ट मंडल की तैयारी और सहयोग

ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम को भव्य रूप देने के लिए कई स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और व्यापारिक मंडलों का सहयोग मिल रहा है। स्थानीय व्यापारी समाज ने दीप, तेल, सजावट सामग्री और भंडारा आयोजन में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगी धनतेरस की रात

धनतेरस की रात रणछोड़ राय मंदिर परिसर केवल दीपों से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रंगों से भी भर उठेगी। भक्ति संगीत, रास-गरबा, और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियाँ इस आयोजन को धार्मिकता के साथ-साथ आनंद का भी उत्सव बनाएंगी।

इनपुट: दौलतआर प्रजापत

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