15 मार्च से श्री मल्लीनाथ पशु मेले का शुभारंभ तिलवाड़ा में बढ़ी रौनक, दूर-दराज से पशुपालकों के साथ पशुओं की आवक शुरू

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सजने लगी दुकानें

मालानी संस्कृति का प्रतीक मल्लीनाथ पशु मेला, तिलवाड़ा में तैयारियां तेज, सजने लगी दुकानें

बालोतरा/तिलवाड़ा। लूणी नदी के तट पर आयोजित होने वाला देशभर में प्रसिद्ध श्री मल्लीनाथ पशु मेला 15 मार्च से विधिवत शुरू होगा। मेले को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं और दूर-दराज क्षेत्रों से पशुपालक अपने पशुओं के साथ तिलवाड़ा पहुंचने लगे हैं।

मेला स्थल पर इन दिनों चहल-पहल बढ़ने लगी है। पशुपालक अपने पशुओं के साथ डेरा डाल रहे हैं, वहीं पशुपालन विभाग और ग्राम पंचायत व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। मेले में आने वाले पशुओं के लिए पानी और चारे की व्यवस्था की जा रही है तथा पशुओं को रखने के लिए मेला स्थल पर टेंट लगाए जा चुके हैं।

प्रसिद्ध चना मार्केट

घोड़े, ऊंट व बैलों की बढ़ी आवक

मेले में प्रतिदिन पशुओं की संख्या बढ़ रही है। सैकड़ों की संख्या में घोड़े, ऊंट और बैल मेले में पहुंच चुके हैं। मेले में विशेष रूप से मालानी नस्ल के घोड़े, थारपारकर गाय और ऊंट बिक्री के लिए लाए जाते हैं, जिन्हें खरीदने के लिए दूर-दूर से व्यापारी पहुंचते हैं। पशुओं की बढ़ती आवक से मेला मैदान में रौनक नजर आने लगी है।

पशुओं की आवक तेज

सजने लगा हाट-बाजार

मेले के साथ हाट बाजार भी सजने लगा है। यहां सजावटी सामान, पारंपरिक हस्तशिल्प और खाद्य सामग्री की दुकानें लगाई जा रही हैं, जहां ग्रामीणों व मेले में आने वाले लोगों की खरीदारी रहती है। प्रशासन की ओर से मेला स्थल की साफ-सफाई और सड़कों की मरम्मत कर अस्थायी स्टॉल भी तैयार किए गए हैं।

सजने लगीं दुकानें

प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम रहेंगे आकर्षण

मेले में ऊंट और घोड़ों की दौड़, बैल जोड़ी प्रतियोगिता तथा सजे-धजे पशुओं की प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। वहीं रात के समय लोक कलाकारों द्वारा चरी, कालबेलिया, घूमर और भजनों की प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जो मेले की रौनक को और बढ़ाएंगी।

मेले के दौरान श्रद्धालु रावल मल्लीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर मनोकामना पूरी होने पर मिट्टी या धातु के छोटे घोड़े चढ़ाते हैं। यह मेला मालानी क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा की पहचान माना जाता है।

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