जोजरी, लूणी और बांडी नदियों के प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: तीसरी बार बालोतरा पहुंची जांच टीम, उद्योगों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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बालोतरा/जोधपुर: मारवाड़ क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली जोजरी, लूणी और बांडी नदियों में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर अब मामला बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। इसी कड़ी में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय जांच कमेटी शनिवार को तीसरी बार बालोतरा पहुंची। इस दौरे ने प्रशासनिक और औद्योगिक हलकों में हलचल तेज कर दी, वहीं प्रभावित ग्रामीणों में भी उम्मीद की नई किरण जगी है।

कमेटी के नेतृत्व में हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश संगीत लोढ़ा ने सबसे पहले डोली कलां, डोली राजगुरां, अराबा चौहान और अराबा दूदावतान गांवों का दौरा किया। यहां उन्होंने खेतों और आबादी के बीच जमा प्रदूषित पानी का मौके पर निरीक्षण किया। ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उन्होंने जाना कि इस जहरीले पानी का असर न केवल फसलों पर बल्कि पशुधन, पेयजल स्रोतों और मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से औद्योगिक अपशिष्ट और सीवरेज का पानी नदियों में बहाया जा रहा है, जिससे जमीन बंजर होती जा रही है और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इस पर न्यायाधीश लोढ़ा ने आश्वासन दिया कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

सैंपलिंग और तकनीकी जांच पर जोर

गांवों के निरीक्षण के बाद टीम बालोतरा पहुंची, जहां कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) और एचआरटीएस (HRTS) सिस्टम का गहन निरीक्षण किया गया। टीम ने डोली-अराबा क्षेत्र में फैले प्रदूषित पानी के नमूने भी एकत्रित करवाए, ताकि वैज्ञानिक आधार पर प्रदूषण की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।

सीईटीपी प्लांट में समीक्षा बैठक, उद्योगों से जवाब-तलब

सीईटीपी प्लांट में आयोजित समीक्षा बैठक में जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सीईटीपी ट्रस्ट के पदाधिकारी और स्थानीय उद्योगपति शामिल हुए। बैठक में पहले दिए गए निर्देशों की अनुपालना की समीक्षा की गई और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।

जस्टिस लोढ़ा ने प्लांट की कार्यप्रणाली, तकनीकी व्यवस्थाओं और प्रदूषण नियंत्रण उपायों की बारीकी से जांच की। उन्होंने खासतौर पर यह देखा कि औद्योगिक इकाइयां निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रही हैं या नहीं। साथ ही जल गुणवत्ता की स्थिति और अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए।

एचआरटीएस के संचालन पर नाराजगी

दौरे के दौरान एक अहम मुद्दा एचआरटीएस प्लांट का रहा, जिसे बंद करने के आदेश के बावजूद संचालित किया जा रहा था। इस पर न्यायाधीश लोढ़ा ने कड़ी नाराजगी जताते हुए तुरंत इसे बंद करने और स्थायी समाधान लागू करने के निर्देश दिए।

लूणी नदी को लेकर जताई गंभीर चिंता

जस्टिस लोढ़ा ने विशेष रूप से लूणी नदी में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की और कहा कि यदि समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो इसके दुष्परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने उद्योगों को चेतावनी देते हुए कहा कि पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जनप्रतिनिधियों ने भी उठाई आवाज

आरएलपी नेता थानसिंह डोली ने कमेटी को बताया कि जोजरी नदी का प्रदूषण अब पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर संकट बन चुका है। उन्होंने कहा कि इससे किसान, पशुपालक और आमजन सीधे प्रभावित हो रहे हैं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज

सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

जानकारी के अनुसार, जांच कमेटी अपने इस दौरे और पूर्व निरीक्षणों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी। इस रिपोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त दिशा-निर्देश और संभावित कार्रवाई का खाका पेश किया जाएगा।

पहले भी कमेटी जोधपुर, बालोतरा और पाली का दौरा कर प्रारंभिक रिपोर्ट पेश कर चुकी है। अब तीसरे दौरे के बाद अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे निर्णायक माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों में उम्मीद

लंबे समय से प्रदूषण की मार झेल रहे क्षेत्रवासियों और पर्यावरण प्रेमियों को इस हस्तक्षेप से बड़ी उम्मीदें हैं। उनका मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट स्तर पर सख्त कदम उठाए गए तो नदियों को बचाने और क्षेत्र के पर्यावरण को सुधारने की दिशा में ठोस बदलाव संभव हो सकेगा।

यह पूरा मामला अब केवल पर्यावरण नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य और भविष्य की पीढ़ियों से भी जुड़ गया है, जिस पर आने वाले दिनों में बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं।

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