गुरुवार को बालोतरा और आसपास के इलाकों में इन्द्रदेव की मेहरबानी से मौसम ने अचानक करवट ली और दोपहर में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया। करीब 20 मिनट तक हुई इस मूसलधार बारिश ने शहर को दो हिस्सों में बांट दिया—एक ओर किसानों के चेहरों पर खुशी देखने को मिली, तो दूसरी ओर नगर परिषद की लापरवाही से शहरवासी जलभराव की मुसीबत में फंस गए।
गर्मी से मिली राहत, लेकिन गंदगी से बढ़ी परेशानी
गुरुवार दोपहर 11 बजे के बाद अचानक मौसम बदला और तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हुई। कुछ ही मिनटों में तापमान में गिरावट आ गई, जिससे लोगों को गर्मी व उमस से राहत मिली। मगर राहत की यह बारिश जल्द ही परेशानी में बदल गई।
तेज बारिश से बालोतरा की सड़कों पर पानी बहने लगा। कई क्षेत्रों में नालियों का गंदा पानी सड़कों पर फैल गया। शहर की कई प्रमुख कॉलोनियों जैसे नेहरू कॉलोनी, भगतसिंह सर्कल, नयापुरा, पुराना बस स्टैंड, सुभाष चौक और गांधी कॉलोनी के लोग जलजमाव के कारण घरों में कैद हो गए। सड़कों पर पानी भरने से यातायात भी प्रभावित हुआ।
हर बारिश में डूबता है अंडरब्रिज, प्रशासन बेखबर
शहर के दोनों रेलवे अंडरब्रिज एक बार फिर बारिश में फेल हो गए। दोनों अंडरब्रिज जलभराव के चलते पूरी तरह बंद हो गए। यहां पानी इतना भर गया कि राहगीरों और वाहन चालकों को मजबूरी में दूसरे रास्तों से गुजरना पड़ा। लोगों ने बताया कि हर बार बारिश के बाद यही स्थिति बनती है, लेकिन नगर परिषद और रेलवे प्रशासन इस पर ध्यान नहीं देते।
किसानों के लिए राहत की बौछार, खेतों में दौड़ी रौनक
बारिश से शहर में जहां आफत मच गई, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह पानी वरदान साबित हुआ। खेतों में बुआई कार्य तेजी से शुरू हो गया है। किसानों के चेहरे खिले हुए नजर आए। गांवों में ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट सुनाई दी और खेतों में किसान मेहनत करते दिखाई दिए। अच्छी बारिश से खरीफ फसलों की बुआई का कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
बारिश के बाद बदला मौसम, शहरवासियों ने लिया आनंद
बारिश के बाद पूरे शहर का मौसम खुशगवार हो गया। ठंडी हवा के साथ वातावरण में नमी घुल गई। जगह-जगह चाय, पकोड़े, कचौरी की दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने बारिश के बाद के खुशनुमा मौसम का आनंद लिया।
लोगों ने जताई नाराजगी, नगर परिषद पर लगाए आरोप
बारिश के बाद जलभराव और गंदगी को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि नगर परिषद हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन सच्चाई हर बारिश में उजागर हो जाती है। यदि नगर परिषद ने जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए तो आगामी बारिश में हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं।
इस बारिश ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बालोतरा की नगर परिषद केवल कागजों पर ही सक्रिय है। किसानों के लिए यह बारिश खुशहाली का संकेत हो सकती है, लेकिन शहर की जर्जर व्यवस्थाओं ने यह साफ कर दिया कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुए, तो मानसून का हर दौर शहरवासियों के लिए आफत बनकर ही आएगा.
