गुजरात में नेपाली बनकर छिपा बैठा था तस्कर; परिवार ने मौत की कहानी फैलाई थी, रिश्तेदार बनकर घर आया तो पुलिस को लगा सुराग

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25 हजार रुपए के इनामी तस्कर राम स्वरूप गिरफ्तार

बाड़मेर जिले में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने एक ऐसे तस्कर का पर्दाफाश किया है जिसने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी ही मौत की कहानी गढ़ ली थी। परिवार ने पूरे गाँव में फैला दिया था कि वह सड़क हादसे में मारा गया है। लेकिन असल में वह गुजरात के सूरत में नई पहचान बनाकर रह रहा था—नेपाली लड़के की तरह कपड़े पहनकर, नेपाली भाषा बोलकर और नेपाल की ही एक लड़की से शादी करके।

एक साल तक ‘नेपाली दामाद’ बनकर आता-जाता रहा अपने घर

जांच में सामने आया कि फरार आरोपी रामस्वरूप पुत्र देराराम विश्नोई (निवासी—विश्नोईयों का तला, खारा रामसर) फरारी के दौरान गुजरात में पढ़ाई के समय की अपनी नेपाली दोस्त सीमा उर्फ भूरी डॉन से शादी कर चुका था। नेपालियों जैसे पारंपरिक कपड़े पहनने लगा और घर आकर भी खुद को रिश्तेदार के रूप में पेश करता रहा।

गांव में किसी को शक न हो, इसलिए परिवार भी इस कहानी का हिस्सा बना रहा। पुलिस जब भी पूछताछ करने रामस्वरूप के घर पहुंचती, परिजन उसे “एक्सीडेंट में मर चुका” बताकर टाल देते थे। लेकिन कोई दस्तावेज़ या रिकॉर्ड पेश नहीं कर पाते थे।

ANTF की सतर्क निगरानी से खुला राज

आईजी विकास कुमार ने बताया कि टीम को कुछ महीने पहले यह इनपुट मिला कि रामस्वरूप चोरी-छिपे अपने गांव आया है और उसके साथ एक नेपाली महिला भी है। इस जानकारी के बाद ANTF ने उसके मूवमेंट पर गुप्त निगरानी शुरू की।

जांच में पता चला कि उसका नेपाल के कुछ संदिग्ध लोगों से संपर्क है और वह अब भी ड्रग्स नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। इसके बाद टीम ने सूरत में जाल बिछाया और 25 हजार रुपए के इनामी रामस्वरूप को दबोच लिया।

कैसे डीजे साउंड चलाने वाला युवक बन गया ड्रग तस्कर?

जांच से सामने आया कि रामस्वरूप की अपराध की दुनिया में एंट्री लॉकडाउन के बाद हुई। गांव में 8वीं तक पढ़ाई करने के बाद वह 9वीं से गुजरात में रहने लगा। डीजे साउंड सिस्टम चलाने का काम करता था, लेकिन कोविड-19 में यह काम ठप हो गया।

इसी दौरान वह सिणधरी, बाड़मेर निवासी प्रवीण चौधरी के संपर्क में आया। प्रवीण एमडी ड्रग्स के नेटवर्क से जुड़ा था। 2024 में कोतवाली थाना क्षेत्र में एक NDPS मामले में प्रवीण गिरफ्तार हुआ तो पुलिस ने रामस्वरूप को भी आरोपी बनाया। यही वो समय था जब वह गांव से फरार होकर सूरत में जाकर छिप गया और अपनी नई पहचान तैयार कर ली।

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