सार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान यूआईटी सचिव श्रवण सिंह राजावत और आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल के बीच जमकर हुई कहासुनी, वीडियो वायरल होने के बाद मचा राजनीतिक बवाल, सचिव ने सफाई में कहा- “गाली नहीं दी, वीडियो गलत है।”
विस्तार बाड़मेर। बाड़मेर-जैसलमेर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-68) पर गुरुवार को अतिक्रमण हटाने निकली यूआईटी (Urban Improvement Trust) टीम और स्थानीय नेताओं के बीच जबरदस्त विवाद हो गया। मामला उस समय गरमाया जब कार्रवाई की अगुवाई कर रहे यूआईटी सचिव और आरएएस अधिकारी श्रवण सिंह राजावत तथा आरएलपी के स्थानीय नेता हनुमान बेनीवाल के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि यूआईटी सचिव ने बेनीवाल को अपशब्द कह दिए और पुलिस से उन्हें शांति भंग में गिरफ्तार करने तक के निर्देश दे दिए।
हाईवे पर चला अतिक्रमण हटाओ अभियान, लेकिन बीच में बढ़ गया तनाव
प्रदेशभर में सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत गुरुवार सुबह करीब 11 बजे यूआईटी सचिव श्रवण सिंह राजावत पुलिस जाब्ते और जेसीबी मशीनों के साथ जालीपा रोड (NH-68) पहुंचे।
यहां हाईवे किनारे बनी कई दुकानों और ढाबों को अतिक्रमण बताकर तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।
इसी दौरान कार्रवाई की रेंज में आए स्थानीय आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल का भी ढाबा तोड़ने की तैयारी की गई। बेनीवाल ने मौके पर पहुंचकर आपत्ति जताई और कहा कि जब प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की अंतिम तिथि 20 नवंबर तय की है, तो तब तक सबको समान समय दिया जाए। उन्होंने आग्रह किया कि कार्रवाई वहीं से शुरू की जाए जहां से यूआईटी की सीमा प्रारंभ होती है, ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।
‘नेतागीरी करने आया है’, ‘पहले इसका इलाज करो’ – कहासुनी का वीडियो वायरल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हनुमान बेनीवाल के समझाने के बावजूद यूआईटी सचिव का गुस्सा बढ़ गया। उन्होंने टीम को निर्देश देते हुए कहा –
“कौन है ये… पहले इसका इलाज करो, इसका कौनसा अतिक्रमण है, पहले यही तोड़ो। यहां नेतागीरी करने आया है!”
मौके पर मौजूद पुलिस और अधिकारियों ने दोनों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन विवाद लगातार बढ़ता गया। सचिव राजावत ने जेसीबी चालक को भी आदेश दिया कि “सबसे पहले इसका तोड़ो, मैं इसे अंदर डाल दूंगा।”
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो स्थानीय लोगों ने रिकॉर्ड कर लिया, जो कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
बेनिवाल बोले – हमने सिर्फ समय मांगा था, पर गाली सुननी पड़ी
विवाद के बाद आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में नहीं थे, बल्कि सिर्फ इतना अनुरोध किया था कि सबको सात दिन का समय दिया जाए ताकि लोग खुद अपने ढांचे हटा सकें।
“मैंने बस कहा था कि कार्रवाई निष्पक्ष रूप से हो और किसी को बिना सूचना तोड़फोड़ का शिकार न बनना पड़े। लेकिन सचिव महोदय ने अपशब्द कहे और पुलिस को मुझे पकड़ने का आदेश दे दिया। यह एक अधिकारी को शोभा नहीं देता,” बेनीवाल ने कहा।
राजावत ने दी सफाई – ‘किसको गाली दी? वीडियो गलत है’
विवाद बढ़ने के बाद यूआईटी सचिव श्रवण सिंह राजावत ने मीडिया से बात करते हुए अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई NH 68 जालीपा रोड पर चल रही थी, जहां अस्थायी ढाबों और दुकानों को तत्काल हटाने का निर्देश है।
“हम स्थायी निर्माणों को फिलहाल चिह्नित कर रहे हैं, लेकिन जो अस्थायी अतिक्रमण हैं, उन्हें तुरंत हटाया जा रहा है। कुछ लोग हैं जो बाहर से आकर विरोध कर रहे हैं। गालियां देने का आरोप गलत है, मैंने किसी को गाली नहीं दी। वीडियो को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।”
अभियान के दौरान बढ़ती राजनीति और प्रशासनिक सख्ती पर उठे सवाल
बाड़मेर में यह मामला केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं रहा। अब यह विवाद प्रशासनिक गरिमा और जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन उसके लिए समान अवसर और उचित नोटिस मिलना भी उतना ही आवश्यक है।
वहीं कुछ लोगों ने कहा कि “अगर एक अधिकारी सार्वजनिक रूप से किसी जनप्रतिनिधि से इस तरह की भाषा का प्रयोग करेगा तो आम नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करेगा?”
वीडियो वायरल होने के बाद माहौल गरमाया, जांच की मांग
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आरएलपी समर्थकों ने इसे प्रशासन की मनमानी बताया और उच्च अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।
वहीं यूआईटी के अधिकारियों का कहना है कि वे सिर्फ सरकार के आदेशों का पालन कर रहे हैं और किसी भी राजनीतिक दबाव में नहीं झुकेंगे।
सड़क सुरक्षा के नाम पर सख्ती, लेकिन संवाद की कमी पर सवाल
प्रदेश सरकार ने हाल ही में दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए ‘नो एंक्लोजर जोन’ अभियान चलाया है, जिसके तहत राष्ट्रीय और राज्यीय राजमार्गों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि बाड़मेर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में, जहां सैकड़ों परिवार वर्षों से सड़कों किनारे अपने व्यवसाय से आजीविका चला रहे हैं, वहां प्रशासन और आमजन के बीच संवाद की कमी बड़े विवादों का कारण बन रही है।

