बालोतरा तिलवाड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जसोल खंड द्वारा संघ के शताब्दी वर्ष एवं विजयादशमी उत्सव के उपलक्ष्य में रविवार को तिलवाड़ा-बोरावास मंडल के राजकीय संस्कृत विद्यालय मे भव्य पथ संचलन का आयोजित किया गया
कार्यक्रम का शुभारंभ दिप प्रज्वलित कर शस्त्र पूजन के साथ संतों के पावन सानिध्य में हुआ, जिसमें डुंगर भारती महाराज, मुख्य अतिथि नारायण सिंह व शोभसिंह बोरावास की उपस्थिति रही।

संघ के 120 स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में अनुशासित में तिलवाड़ा के प्रमुख मार्गों गौर का चौक, रेलवे स्टेशन चौराहा, महादेव मंदिर, मालियों का वास, डीपी, राजपूतों का वास, रावणा राजपूत वास, मेघवाल वास, देवासी वास, हनुमान मंदिर होते हुए पुनः विद्यालय तक पथ संचलन करते हुए पहुंचे। मार्ग में जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया।

मुख्य वक्ता शैतान सिंह किटनोद ने अपने उद्बोधन में कहा: कि “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रत्येक स्वयंसेवक एवं समाजबंधुओं को पञ्चजन्य की अवधारणा को समझकर अपने जीवन में उतारना चाहिए। परिवर्तन की शुरुआत अपने घर और स्वयं से करनी होगी।

खंड प्रचारक घनश्याम ने कहा समाज का प्रत्येक व्यक्ति संघ की शाखा से जुड़ेगा, तभी व्यक्तित्व निर्माण और नए समाज का निर्माण संभव होगा। हमें छुआछूत और भेदभाव को भूलकर समरसता के साथ आगे बढ़ना होगा। आज संपूर्ण विश्व भारत की ओर आशा से देख रहा है।”

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। पथ संचलन के दौरान अनुशासन, देशभक्ति और एकता की झलक देखने को मिली।

