महापूर्ण कुंभ यात्रा उपरांत जसोलधाम में भव्य आशीर्वचन कार्यक्रम, श्रद्धा और भक्ति का संगम बना परिसर

Narpat Mali
4 Min Read
महापूर्ण कुंभ यात्रा उपरांत जसोलधाम में भव्य आशीर्वचन कार्यक्रम,भजन संध्या का आयोजन

जसोल, बालोतरा। श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल की ओर से जसोल नगर पालिका सर्व समाज छत्तीशी कौम के श्रद्धालुओं के लिए आयोजित की गई महापूर्ण कुंभ धार्मिक यात्रा जो जसोलधाम से वृंदावन, प्रयागराज और अयोध्या धाम होकर सकुशल पुनः जसोल लौटी श्री के उपलक्ष्य में गुरुवार रात्रि को जसोलधाम परिसर में भव्य आशीर्वचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन जगतगुरू गर्गाचार्य महेंद्रानंद गिरी महाराज एवं  महंत  नारायण गिरी महाराज के पावन सानिध्य में संपच हुआ।

महाराज  के आशीर्वचन से श्रद्धालुओं को धर्म, साधना, सेवा और मानवता के मूल आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिली।

रावल किशन सिंह जसोल ने कहा- यह यात्रा श्रद्धा और एकता का प्रतिबिंब संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने अपने प्रेरणादायक प्रवचन में कहा कि “महापूर्ण कुंभ यात्रा श्री राणीसा भटियाणीसा की असीम कृपा से संपन्न हुई है। यह यात्रा बद्धालुओं की अटूट आस्था, अनुशासन और सेवा भावना का प्रतिबिंब है। इस यात्रा ने प्रत्येक सहभागी को धर्म, संस्कृति और भक्ति के गहरे मूल्यों से जोड़ा है।

वृंदावन, प्रयागराज और अयोध्या धाम में जसोलधाम के श्रद्धालुओं ने जिस समर्पण और अनुशासन का परिचय दिया, वह भविष्य में समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।”

महेंद्रानंद गिरी महाराज का आशीर्वचन परंपरा, शौर्य और संस्कार की भूमि है यह

जगतगुरु  महेंद्रानंद गिरी  महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि “श्री रावल मल्लीनाथ जी, श्री राणी रूपादे जी, बी जैसल जी उनकी रानी तोरल और मेघधारु जी जैसे महापुरुष यहां की आत्मा यह भूमि शीर्य, श्रद्धा, सेवा और संस्कारों से अनुप्राणित है।

जसोलधाम तीर्थ धर्म, एकता और संस्कृति का केंद्र है।

श्री राणीसा भटियाणीसा की कृपा से यह धरा युगों तक समाज को भक्ति और सदाचार की दिशा देती रहे।” 

नारायण गिरी  महाराज के आशीर्वचन- जसोलधाम भक्ति और सेवा की जीवंत परंपरा

महापूर्ण कुंभ यात्रा उपरांत जसोलधाम में भव्य आशीर्वचन कार्यक्रम, श्रद्धा और भक्ति का संगम बना परिसर 1001603355 1
महापूर्ण कुंभ यात्रा उपरांत जसोलधाम में भव्य आशीर्वचन

 नारायण गिरी  महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि “जसोलधाम की पहचान उसकी भक्ति और अनुशासन में निहित है। श्री राणीसा भटियाणीसा की कृपा से थद्धालु सदैव समाज में प्रेम, करुणा और समरसता का संदेश प्रसारित करते हैं। धर्म की रक्षा और भक्ति की साधना, जसोलधाम की शाश्वत परंपरा है।”

संन्यास दीक्षा का पवित्र क्षण

आशीर्वचन कार्यक्रम के दौरान महेंद्रानंद गिरी महाराज ने अपने शिष्य को संन्यासी की दक्षिणा प्रदान की। महाराज  ने शिष्य को संन्यास दीक्षा देकर उसका नाम श्री अरुणानंद गिरी जी महाराज रखा। पूरे परिसर में इस दिव्य क्षण के दौरान ‘हरि-नाम संकीर्तन” और “मां जसोल जयघोष” गूंज उठे, जिससे वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक हो गया।

कार्यक्रम में संस्थान सचिव गजेन्द्र सिंह जसोल एवं समिति सदस्य कुंवर हरिवंद्र सिंह जसोल, प्रबुद्धजन, साधु-संतगण एवं सर्व समाज के धर्मप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

महाप्रसादी और भजन संध्या श्रद्धा का उत्सव

महापूर्ण कुंभ यात्रा उपरांत जसोलधाम में भव्य आशीर्वचन कार्यक्रम, श्रद्धा और भक्ति का संगम बना परिसर 1001603356
भजन संध्या आयोजित

कार्यक्रम के दौरान महाप्रसादी का दिव्य आयोजन हुआ, जिसमें बद्धालुओं ने सपरिवार सम्मिलित होकर धर्म-पुण्य लाभ प्राप्त किया। रात्रि में भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें बाड़मेर के मांगणियार कलाकारों और जैसलमेर के मेघवंशी कलाकारों ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दीं।

संपूर्ण जसोलधाम परिसर हरि-नाम संकीर्तन से गूंज उठा और भक्तजन भक्ति रस में लीन हो गए।

आभार एवं समापन

कार्यक्रम के समापन पर श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल की ओर से संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने सभी श्रद्धालुओं, कलाकारों एवं सेवा में संलग्न कार्यकर्ताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया गया।

यह महापूर्ण कुंभ यात्रा उपरांत आशीर्वचन कार्यक्रम जसोलधाम की भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक एकता का उज्वल उदाहरण बनकर सदा स्मरणीय रहेगा।

Share This Article