पिछले एक महीने का अंदाज़ा 60 से अधिक लोगों ने सड़क दुर्घटनाओं में गंवा दी जान
राजस्थान में सड़क हादसों का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले एक महीने पर नज़र डालें तो अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि 60 से अधिक लोगों ने अपनी जान सड़क दुर्घटनाओं में गंवा दी है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुई ये घटनाएँ न केवल चौंकाती हैं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
जैसलमेर अग्निकांड बस हादसा – भीषण आग में 26 लोगों की दर्दनाक मौत। ,
बालोतरा (बागुड़ी) MR बस–कार भिड़ंत – पति-पत्नी और बेटे की मौत, 23 यात्री घायल।,
सिणधरी हादसा – ट्रेलर से टकराने के बाद स्कॉर्पियो में लगी आग, 4 दोस्तों की जलकर मौत।
जयपुर हादसा – हाईटेंशन लाइन की चपेट में आई स्लीपर बस, 2 की मौत, 12 घायल।
सांचौर भारतमाला एक्सप्रेस-वे हादसा – जसोल निवासी एक ही परिवार के 3 सदस्य—पति, पत्नी और मासूम बेटी—की मौत।
फलोदी-जोधपुर भारतमाला बस हादसा – 15 लोगों की मौत, कई गंभीर घायल।
हाल ही में हुआ जयपुर डंपर हादसा – 14 लोगों की मौत, कई घायल।
इनके अलावा भी कई ऐसी घटनाएँ हैं जो मीडिया की सुर्खियों तक नहीं पहुँच पाती, लेकिन लोगों की जान ले रही हैं।
आखिर वजह क्या है?
लगातार सामने आ रहे इन हादसों की सबसे बड़ी वजह एक ही दिखाई देती है लापरवाहीचाहे चालकों की हो, सड़क निर्माण में हो, ओवरस्पीडिंग हो, सड़क पर खड़े भारी वाहनों की खतनाक पोज़िशनिंग हो या ट्रैफिक नियमों की अनदेखी नतीजा अक्सर मौत के रूप में सामने आता है।
