बालोतरा।
राजस्थान के बालोतरा जिले से रोज़गार की तलाश में सऊदी अरब गए एक युवक की मौत के बाद उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सऊदी अरब में संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाने वाले रमेश मेघवाल का शव एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भारत नहीं पहुंच सका है। शव के इंतजार में पूरा परिवार टूट चुका है और न्याय की आस में अब मामला राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।
बालोतरा जिले के बायतु क्षेत्र के गिड़ा/सोहड़ा गांव निवासी 42 वर्षीय रमेश मेघवाल 13 नवंबर को सऊदी अरब में मृत पाए गए थे। रमेश वैध वीजा पर काम करने के लिए विदेश गए थे, लेकिन मौत के बाद से अब तक उनके पार्थिव शरीर को स्वदेश नहीं लाया जा सका है। इस देरी को गंभीर मानते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की सिंगल बेंच ने केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार और सऊदी अरब स्थित दूतावास के काउंसलर को नोटिस जारी कर त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
काम का झांसा, हकीकत में अमानवीय हालात
परिजनों के अनुसार रमेश को चार एजेंट सवाई खान, छोटू खान, बहादुर खान और चेनाराम काम दिलाने के नाम पर सऊदी अरब लेकर गए थे। परिवार का कहना है कि रमेश को ऊंटों की देखभाल का “हल्का काम” बताया गया था। एजेंटों ने भरोसा दिलाया था कि काम केवल 2–3 घंटे का होगा, आराम के लिए पर्याप्त समय मिलेगा, साथ ही एसी कमरा और अन्य सुविधाएं भी होंगी।
लेकिन सऊदी अरब पहुंचने के बाद हालात बिल्कुल उलट निकले। रमेश से 20–25 ऊंटों की जगह करीब 100 ऊंटों की देखभाल करवाई जा रही थी। काम का दबाव अत्यधिक था और श्रमिकों की संख्या कम। परिजनों का आरोप है कि रमेश के साथ मारपीट की जाती थी और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। रमेश ने कई बार घर फोन कर अपने हालात बताए और वापस भारत लौटने की इच्छा जताई थी, लेकिन इससे पहले ही उसकी मौत की खबर आ गई।
आत्महत्या के दावे पर परिवार को भरोसा नहीं
केंद्र सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल भारत व्यास ने बताया कि 10 दिसंबर को रियाद स्थित भारतीय दूतावास के कम्युनिटी वेलफेयर विभाग से ईमेल प्राप्त हुआ है, जिसमें युवक की मौत को कथित आत्महत्या बताया गया है। उन्होंने कहा कि सऊदी पुलिस मामले की जांच कर रही है और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है।
हालांकि परिवार इस दावे को सिरे से खारिज कर रहा है। मृतक की मां तीजो देवी और बड़े भाई गेनाराम का कहना है कि रमेश मजबूत इरादों वाला, पढ़ा-लिखा और मेहनती युवक था। उसने बीएसटीसी की पढ़ाई की थी और आगे की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाने के उद्देश्य से विदेश गया था। परिजनों का मानना है कि रमेश आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकता, उसकी मौत के पीछे साजिश या गंभीर लापरवाही हो सकती है।
परिवार की हालत बद से बदतर
शव न आने के कारण रमेश के घर में पिछले एक महीने से मातम पसरा हुआ है। मां तीजो देवी की आंखें बेटे के अंतिम दर्शन की राह देखते-देखते सूख चुकी हैं। सभी रिश्तेदार अपने काम-धंधे छोड़कर घर पर ही जमा हैं। रमेश का एक भाई कतर में काम करता था, वह भी यह खबर सुनकर सदमे में भारत लौट आया। घर में हर दिन रोना-बिलखना और इंतजार ही बचा है।
परिजनों ने सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर विदेश मंत्रालय और सऊदी दूतावास को पत्र लिखवाए। बावजूद इसके जब एक महीने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो मजबूर होकर परिवार को न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
राजस्थान हाईकोर्ट ने शव लाने में हो रही देरी पर गहरी चिंता जताते हुए इसे मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। कोर्ट ने कहा कि एक मृत व्यक्ति के परिवार को इस तरह लंबे समय तक इंतजार में रखना अस्वीकार्य है। अदालत ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 17 दिसंबर को निर्धारित की है।
परिवार की एक ही मांग
परिजनों की मांग है कि रमेश मेघवाल का शव जल्द से जल्द भारत लाया जाए, सऊदी अरब में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाई जाए और यदि किसी की लापरवाही या अपराध सामने आता है तो दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाए। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद आज उन्हें इस पीड़ा से नहीं गुजरना पड़ता।
यह मामला न केवल एक परिवार के दर्द की कहानी है, बल्कि विदेशों में काम करने गए भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा, एजेंटों की भूमिका और सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

