Balotra अरावली की गोद में चल रहा था प्रदूषण का काला कारोबार, सिणेर में 7 अवैध कपड़ा धुपाई फैक्ट्रियां ध्वस्त

Narpat Mali
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सिवाना (बालोतरा) उपखंड के सिणेर गांव की सरहद में अरावली पर्वतमाला के बीच वर्षों से छुपकर चल रहे अवैध कपड़ा धुपाई उद्योग पर आखिरकार प्रशासन ने सख्त प्रहार किया है। कृषि भूमि का दुरुपयोग कर संचालित की जा रही सात अवैध कपड़ा धुपाई फैक्ट्रियों को प्रदूषण नियंत्रण मंडल, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने जेसीबी मशीनों की मदद से ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इन अवैध फैक्ट्रियों में बड़े पैमाने पर कपड़ा धुपाई का कार्य किया जा रहा था, जिससे निकलने वाला रसायनयुक्त पानी सीधे खेतों में बने गड्ढों में बहाया जा रहा था। इससे न केवल कृषि भूमि बंजर होने की कगार पर पहुंच गई थी, बल्कि भूजल प्रदूषण का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा था।

कार्रवाई  भनक लगते ही खाली कर दिए गए परिसर

कार्रवाई से पहले ही फैक्ट्री संचालकों को प्रशासनिक हलचल की जानकारी मिल गई थी। इसी कारण छापे से पहले ही कपड़े की गांठें और तैयार माल वहां से हटा लिया गया। हालांकि, मौके पर फैक्ट्रियों के आसपास फैला रासायनिक पानी, होदियों के अवशेष और कपड़ा सुखाने के अडाण इस बात की साफ गवाही दे रहे थे कि यहां लंबे समय से अवैध रूप से औद्योगिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं।

संयुक्त टीम ने की सुनियोजित कार्रवाई

प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक तंवर, तहसीलदार सिवाना रायचंद देवासी, बीडीओ तथा एएसआई महेंद्रसिंह के नेतृत्व में पुलिस बल और प्रशासनिक अमला जेसीबी मशीनों के साथ सिणेर पहुंचा। टीम ने सुनियोजित तरीके से अलग-अलग कृषि फार्म हाउसों पर दबिश दी, जहां सात स्थानों पर अवैध कपड़ा धुपाई इकाइयां पाई गईं।

जेसीबी मशीनों से कपड़ा सुखाने के अडाण, रसायन भरने की होदियां, अस्थायी ढांचे और अन्य उपकरणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई देर शाम तक जारी रही और पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, ताकि किसी अन्य अवैध इकाई के संचालन की संभावना को भी खत्म किया जा सके।

मीठे पानी के लालच में खेत बने फैक्ट्री

जानकारी के अनुसार, सिणेर क्षेत्र में कृषि कुओं और ट्यूबवेलों में मीठा पानी उपलब्ध है। इसी वजह से बालोतरा क्षेत्र की कई कपड़ा फैक्ट्रियों से सिलिकेट और अन्य रसायनों से धुपाई के लिए कपड़ा यहां लाया जाता था। खेतों के बीच गुप्त रूप से फैक्ट्रियां स्थापित कर नियमों को ताक पर रखा गया और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

धुपाई के बाद निकलने वाला रसायनयुक्त अपशिष्ट खेतों में ही गड्ढे खोदकर बहा दिया जाता था। इससे मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो रही थी और आसपास के जलस्रोत भी धीरे-धीरे प्रदूषित हो रहे थे।

दबंगई और लालच बना पर्यावरण के लिए खतरा

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि अधिक मुनाफे के लालच में कुछ दबंग लोगों द्वारा यह अवैध कारोबार लंबे समय से चलाया जा रहा था। भय और प्रभाव के चलते इसकी जानकारी बाहर आना मुश्किल हो रही थी। ग्रामीणों में भी प्रदूषण को लेकर अंदरूनी नाराजगी थी, लेकिन खुलकर शिकायत करने का साहस बहुत कम लोग जुटा पा रहे थे।

आगे भी जारी रहेगी सख्ती

प्रदूषण नियंत्रण मंडल और प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इस तरह की अवैध गतिविधियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। कृषि भूमि पर उद्योग संचालन, रसायनयुक्त अपशिष्ट का अवैध निस्तारण और भूजल प्रदूषण करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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