बूंद-बूंद पानी को तरसते ग्रामीण, शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी अधिकारियों के सामने धरने पर बैठे

BHAWANI SINGH
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बाड़मेर। एक ओर जहां पश्चिमी राजस्थान में कड़ाके की सर्दी आम जनजीवन को प्रभावित कर रही है, वहीं दूसरी ओर बाड़मेर जिले में पेयजल संकट लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। खासतौर पर शिव विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि जनप्रतिनिधियों को भी सड़क और दफ्तरों में उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है। इसी क्रम में बुधवार को शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने बाड़मेर जिला मुख्यालय पहुंचकर जलदाय विभाग कार्यालय में अधिकारियों के सामने धरना देकर प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया।

अधिकारियों से बातचीत विफल, जमीन पर बैठकर जताया विरोध

जानकारी के अनुसार विधायक भाटी जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता परशुराम वर्मा से शिव क्षेत्र में लंबे समय से चल रही पानी की समस्या को लेकर चर्चा करने पहुंचे थे। बैठक के दौरान जब विधायक को समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई स्पष्ट कार्ययोजना या समयबद्ध जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने कुर्सी छोड़ दी और सीधे अधिकारी के सामने जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया।

विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक ग्रामीणों को राहत देने वाला ठोस और लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक वे धरने से नहीं उठेंगे।

हरसानी गांव बना जलसंकट का प्रतीक

दरअसल, शिव विधानसभा क्षेत्र के हरसानी गांव सहित आसपास के कई गांवों में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि न तो नियमित जलापूर्ति हो रही है और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। पानी की किल्लत से परेशान ग्रामीण पिछले दो दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं।

बुधवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने रैली निकालकर बाजार बंद कराया, जिससे पूरे क्षेत्र में जनजीवन ठप सा हो गया। ग्रामीणों की इस पीड़ा और आंदोलन को समर्थन देने के लिए विधायक भाटी खुद बाड़मेर पहुंचे और जलदाय विभाग कार्यालय में धरने पर बैठ गए।

“एक साल से लिख रहा हूं पत्र, कोई सुनवाई नहीं”

धरने के दौरान विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वे पिछले एक वर्ष से लगातार जलदाय विभाग को पत्र लिखकर शिव क्षेत्र में पेयजल संकट से अवगत करा रहे हैं, लेकिन न तो पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू हुआ और न ही स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया।

उन्होंने कहा, “आज हालात यह हैं कि गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों की आंखों में आंसू हैं और प्रशासन केवल आश्वासन देकर समय काट रहा है।”

लिखित आश्वासन पर अड़े विधायक

विधायक भाटी ने अधिकारियों से स्पष्ट मांग की कि वे लिखित में यह बताएं कि किन-किन गांवों में, किस योजना के तहत और कितने दिनों के भीतर पानी की आपूर्ति शुरू की जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एक साल में भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है, तो इसकी जवाबदेही कौन लेगा और जनता को क्या जवाब दिया जाएगा।

धरने के दौरान अधिकारी बार-बार विधायक से कुर्सी पर बैठने और बातचीत से समाधान निकालने का आग्रह करते रहे, लेकिन विधायक अपनी मांगों पर अडिग रहे।

समाचार लिखे जाने तक धरना जारी

समाचार लिखे जाने तक शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी जलदाय विभाग कार्यालय में धरने पर बैठे हुए थे। वहीं, ग्रामीणों और स्थानीय लोगों की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई थीं। पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर बाड़मेर जिले में पेयजल व्यवस्था की जमीनी हकीकत और प्रशासनिक उदासीनता को उजागर कर दिया है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस आंदोलन को कितनी गंभीरता से लेता है और शिव विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों को कब तक पेयजल संकट से राहत मिल पाती है।

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