तिलवाड़ा में विश्वविख्यात ऐतिहासिक श्री रावल मल्लीनाथ जी पशु मेले का भव्य शुभारंभ

Narpat Mali
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दिनभर हुए धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजन

तिलवाड़ा | बालोतरा स्थित श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, थान मल्लीनाथ में चैत्र कृष्ण पक्ष एकादशी, रविवार 15 मार्च 2026 को राजस्थान के विश्वविख्यात एवं ऐतिहासिक श्री रावल मल्लीनाथ जी पशु मेले का विधिवत शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और वैदिक विधि-विधान के साथ हुआ। मेले के शुभारंभ अवसर पर मंदिर परिसर में दिनभर विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें मालाणी क्षेत्र सहित दूर-दराज से पधारे श्रद्धालु भक्तों, पशुपालकों और ग्रामीणों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही।

प्रातःकाल मंदिर में मंगला आरती के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। इसके पश्चात आयोजित अष्ट प्रकृति महायज्ञ में श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा के अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल एवं प्र. उपाध्यक्ष कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने यज्ञ में आहुतियां देकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, समय पर वर्षा, पशुधन की वृद्धि एवं जनकल्याण की मंगलकामना की।

इस अवसर पर आचार्य अभिषेक जोशी एवं उनकी टीम के विद्वान आचार्यों और पंडितों ने वैदिक विधि-विधान से अष्ट प्रकृति महायज्ञ संपन्न करवाया। यज्ञ के दौरान विभिन्न वैदिक मंत्रों, स्तोत्रों और धार्मिक पाठों का मंत्रोच्चारण करते हुए क्षेत्र में शांति, समृद्धि और लोककल्याण की प्रार्थना की गई।

इसके पश्चात गुरु महाराज श्री नृत्य गोपालराम जी महाराज (गढ़ सिवाना) एवं महंत श्री शंभुवन जी महाराज (श्री दूधेश्वर महादेव मठ, टापरा) के पावन सानिध्य में संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल द्वारा मालाणी क्षेत्र के सर्व समाज के प्रबुद्धजनों तथा सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण किया गया।

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हवन पूजन

तत्पश्चात महंत श्री गणेशपुरी जी महाराज के पावन सानिध्य में धूणा चेतन कर निःशुल्क भोजनशाला का शुभारंभ किया गया। यह निःशुल्क भोजनशाला श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल द्वारा संचालित की जा रही है, जो 15 मार्च से 21 मार्च तक सात दिनों तक चलेगी। इस दौरान मेले में पधारने वाले श्रद्धालुओं, पशुपालकों एवं आगंतुकों के लिए प्रसादी भोजन की व्यवस्था की गई है।

मेले के शुभारंभ अवसर पर श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर थान मल्लीनाथ (तिलवाड़ा), श्री राणी रूपादे जी मंदिर पालिया (तिलवाड़ा) एवं श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर मालाजाल (तिलवाड़ा) में विशेष रूप से महाप्रसादी का भोग अर्पित किया गया।

इसके पश्चात तिलवाड़ा, बोरावास एवं थान मल्लीनाथ ग्रामों की सर्व समाज की कन्याओं का विधिवत पूजन कर उन्हें फल प्रसाद एवं अन्न प्रसाद प्रदान कर दक्षिणा भेंट की गई। कन्या पूजन कार्यक्रम में राजस्थान सरकार में राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बिश्नोई सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। तत्पश्चात मेले में पधारे मेलार्थियों, पशुपालकों और स्थानीय ग्रामवासियों को महाप्रसादी का वितरण किया गया।

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कन्या भोजन

इस अवसर पर संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने कहा कि श्री रावल मल्लीनाथ जी मालाणी क्षेत्र के संस्थापक, लोकदेवता, महान वीर योद्धा और सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में धर्म, गौ रक्षा, लोककल्याण और जनसेवा के उच्च आदर्श स्थापित किए, जिनसे मालाणी क्षेत्र की धार्मिक और सामाजिक परंपराओं को सुदृढ़ दिशा मिली। श्री राणी रूपादे जी भक्ति, त्याग, सेवा और आध्यात्मिक साधना की प्रेरणादायी स्वरूप हैं। 

श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी के भजनों और उपदेशों में लगभग सात सौ वर्ष पूर्व समाज को सत्य, धर्म, सेवा, सद्भाव और एकता के मार्ग पर चलने का संदेश दिया गया, जो आज भी समाज को प्रेरित करता है। लगभग सात सौ वर्ष पूर्व श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी ने अपने गुरु उगमसी भाटी के पावन सानिध्य में तिलवाड़ा में विशाल संत समागम का आयोजन किया, जिससे इस ऐतिहासिक मेले की परंपरा प्रारंभ हुई। उस संत समागम में मेवाड़ से महाराणा कुम्भा एवं उनकी राणी, गुजरात से जैसल एवं उनकी राणी तोरल (कच्छ-काठियावाड़) तथा बाबा रामदेवजी सहित उस समय के अनेक समकालीन संत-महात्मा पधारे थे।ए

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सभा आयोजित

श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी निजिया पंथ से जुड़े हुए थे। उनके गुरु उगमसी भाटी तथा गुरु भाई मेघधारू जी थे। इस पंथ की विशेषता निराकार उपासना की परंपरा रही है, जिसमें भक्ति, सेवा, सत्य और सामाजिक समरसता का संदेश दिया जाता है।

तिलवाड़ा का यह ऐतिहासिक पशु मेला राजस्थान की आस्था, लोकसंस्कृति और पशुधन परंपरा का महत्वपूर्ण उत्सव है, जहां प्रदेश सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से पशुपालक अपने पशुधन के साथ पहुंचकर पशुओं का आदान-प्रदान करते है तथा श्रद्धालु भक्त श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी के दर्शन कर अपनी आस्था प्रकट करते हैं।

सांयकाल में 07.40 बजे मेले के परिसर स्थित सांस्कृतिक मंच पर मरूगंगा आरती का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर मारवाड़ की जीवनरेखा मरूगंगा लूणी नदी के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण तथा वृक्षों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सामूहिक संकल्प लिया जाएगा।

कार्यक्रमों के दौरान पुष्कर से आए नगारची कलाकारों, घुड़ नृत्य कलाकारों, गैर नृत्य दलों तथा स्थानीय दमामी कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं, जिससे पूरे आयोजन में मारवाड़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और धार्मिक परंपरा का सुंदर संगम देखने को मिला।

इस दौरान श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा के समिति सदस्यगण, श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल के समिति सदस्यगण, मालाणी क्षेत्र के प्रबुद्धजन, श्री रावल मल्लीनाथ जी के वंशजों सहित हजारों श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित रहे।

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