चैत्र शुक्ल पक्ष त्रयोदशी पर जसोलधाम में उमड़ा अपार श्रद्धा का महासागर, दिनभर गूंजा “जय माँ जसोल” का जयघोष

Narpat Mali
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बालोतरा जसोल। चैत्र शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के पावन एवं पुण्यप्रद अवसर पर जसोलधाम में आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्वितीय संगम देखने को मिला। प्रातःकालीन मंगला आरती के साथ ही सम्पूर्ण धाम भक्तिरस में सराबोर हो उठा। सूर्योदय से पूर्व ही हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचने लगे और देखते ही देखते पूरा परिसर श्रद्धालुओं के जनसैलाब से भर गया।

भक्तजन अत्यंत अनुशासन एवं श्रद्धा के साथ कतारबद्ध होकर श्री राणीसा भटियाणीसा सहित मंदिर परिसर स्थित समस्त देवी-देवताओं के दर्शन करते रहे। “जय माँ जसोल” के गगनभेदी जयघोष, घंटा-घड़ियाल की मधुर ध्वनि एवं भजन-कीर्तन से सम्पूर्ण वातावरण दिव्य एवं अलौकिक बन गया।

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जय कारों से गूंजा जसोल धाम

इस विशेष अवसर देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु जसोलधाम पहुंचे। अनेक परिवार अपने नवजात शिशुओं का प्रथम दर्शन कराने तथा नवविवाहित जोड़े अपने दांपत्य जीवन के मंगल आशीर्वाद हेतु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। नवदम्पत्तियों ने माँ के श्रीचरणों में शीश नवाकर अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मंदिर संस्थान द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए व्यापक एवं उच्च स्तरीय व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। दर्शन व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने हेतु बहु-स्तरीय कतार प्रणाली, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता व्यवस्था तथा सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी गई।

पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से श्रद्धालुओं को समय-समय पर आवश्यक सूचनाएं एवं दिशा-निर्देश दिए जाते रहे, जिससे भीड़ के बावजूद व्यवस्था पूर्णतः नियंत्रित एवं सुचारू बनी रही।

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प्रसादी भोंग

मंदिर संस्थान द्वारा विशेष रूप से दिव्यांगजन एवं वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए सहयोग व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई, जिससे उन्हें सहज रूप से दर्शन लाभ प्राप्त हो सके।

इस पावन अवसर पर अन्नपूर्णा प्रसादम् (भोजन प्रसादी) एवं छप्पन भोग का अत्यंत भव्य एवं श्रद्धामय आयोजन सम्पन्न हुआ। इस पुण्य कार्य के लाभार्थी ताजाराम सुपुत्र भैराराम एवं मूलाराम सुपुत्र भोमाराम, निवासी आकड़ली रहे। हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण कर स्वयं को धन्य किया तथा माँ की कृपा प्राप्त की।

परंपरा के अनुरूप कन्या पूजन कार्यक्रम भी अत्यंत श्रद्धा एवं वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न किया गया। कन्याओं को माँ का स्वरूप मानकर उनका पूजन, चरण वंदन, भोजन एवं दक्षिणा अर्पित की गई। यह आयोजन भारतीय सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं का जीवंत उदाहरण रहा।

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सैकड़ों भक्तों ने किए दर्शन

सायंकाल में मंदिर परिसर में भव्य भजन संध्या एवं जागरण का आयोजन हुआ, जिसमें भक्ति और लोकसंस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिला। गैर नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पुष्कर से आए नगारची कलाकारों ने अपने पारंपरिक नगाड़ा वादन से वातावरण को जोश, ऊर्जा और उत्साह से भर दिया। वहीं हड़वा (बाड़मेर) से आए सुप्रसिद्ध भजन कलाकारों ने मधुर, भावपूर्ण एवं भक्तिरस से ओत-प्रोत भजनों की प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को देर रात तक भक्ति में लीन रखा।

स्थानीय दमामी कलाकारों द्वारा ढोल, नगाड़ा एवं थाली की पारंपरिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए, जिससे सम्पूर्ण परिसर लोक-सांस्कृतिक रंग में रंग गया।

आधुनिक युग के अनुरूप मंदिर संस्थान द्वारा डिजिटल माध्यमों का भी प्रभावी उपयोग किया गया। लाइव आरती एवं दर्शन प्रसारण के माध्यम से देश-विदेश में विराजमान लाखों श्रद्धालुओं ने घर बैठे ही माँ जसोल के दर्शन किए। इस पहल को श्रद्धालुओं द्वारा अत्यंत सराहना मिली और इसे आस्था एवं तकनीक का सुंदर समन्वय बताया गया।

मंदिर परिसर में साफ-सफाई, पार्किंग व्यवस्था, यातायात नियंत्रण तथा स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका भी विशेष रूप से सराहनीय रही। 

स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस विभाग का भी सहयोग प्राप्त हुआ, जिससे सम्पूर्ण आयोजन पूर्णतः सुरक्षित एवं सफल रहा।

मंदिर संस्थान के प्रवक्ता कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने बताया कि जसोलधाम में श्रद्धालुओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए संस्थान द्वारा भविष्य में और अधिक आधुनिक, सुविधाजनक एवं व्यवस्थित व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।

उन्होंने सभी श्रद्धालुओं, सेवाभावी कार्यकर्ताओं, प्रशासन एवं सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सामूहिक सहयोग से ही यह भव्य एवं दिव्य आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हो पाया।

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