बालोतरा के सिवाना क्षेत्र में दुर्लभ खनिजों का विशाल भंडार

Narpat Mali
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राजस्थान का बालोतरा क्षेत्र अब केवल रेगिस्तान या सीमावर्ती जिले के तौर पर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह इलाका अब भारत की औद्योगिक, सामरिक और तकनीकी प्रगति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण भूखंड के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। इस क्षेत्र में अत्यंत दुर्लभ और रणनीतिक महत्व के खनिजों की मौजूदगी ने देश के वैज्ञानिक और औद्योगिक समुदाय के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।

हाल ही में संसद सत्र के दौरान बालोतरा के सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में भारत सरकार के खान मंत्रालय ने यह औपचारिक रूप से स्वीकार किया है कि बालोतरा सहित बाड़मेर और जैसलमेर क्षेत्र में न केवल चूना पत्थर और मृदा तत्त्व जैसे सामान्य खनिज मौजूद हैं, बल्कि इनमें थोरियम, नायोडिमियम, टैंटलम, जिरकोनियम, नाइओबियम, रेनियम, रेडियम और रुबिडियम जैसे अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान खनिजों का विशाल भंडार भी समाहित है। इन खनिजों का उपयोग न केवल परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में होता है, बल्कि यह रक्षा तकनीक, स्पेस रिसर्च, इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग जैसी आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में भी अपरिहार्य भूमिका निभाते हैं।

खान मंत्रालय द्वारा संसद में दिए गए आधिकारिक जवाब के अनुसार, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टोरेट (AMD) ने इस क्षेत्र में अब तक कुल 47 भूगर्भीय सर्वेक्षण किए हैं। इनमें सिवाना (बालोतरा) क्षेत्र को विशेष रूप से चिन्हित किया गया है, जहां भारी मात्रा में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उपस्थिति को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया गया है। थोरियम के 81.8 मिलियन टन, नायोडिमियम के 67.6 मिलियन टन, टैंटलम के 6.8 मिलियन टन और जिरकोनियम के 52.5 मिलियन टन जैसे विशाल भंडार इस क्षेत्र की सामरिक और आर्थिक उपयोगिता को रेखांकित करते हैं।

सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने इस जानकारी को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए सरकार की रणनीतिक चुप्पी और नीतिगत अस्पष्टता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने बड़े खनिज भंडार और उनकी वैश्विक महत्ता के बावजूद भारत सरकार ने अब तक इस क्षेत्र के दोहन, संरक्षण और स्थानीय विकास के लिए कोई ठोस नीति या कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं की है। न तो खनन आधारित औद्योगिक क्लस्टर की कोई घोषणा हुई है, न ही इस खनन गतिविधि के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए कोई रोडमैप बनाया गया है।

बेनीवाल ने सरकार की इस निष्क्रियता को एक बड़ी रणनीतिक चूक करार देते हुए कहा कि जिस तरह से इन खनिजों की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है, और भारत आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है, उस परिप्रेक्ष्य में इस क्षेत्र को जल्द से जल्द राष्ट्रीय खनिज नीति में प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार इस क्षेत्र में पारदर्शी खनन ढांचे, निवेश नीति, लीज आवंटन प्रणाली, मूल्य संवर्धन और स्थानीय औद्योगीकरण के लिए समग्र और व्यावहारिक रणनीति बनाए, जिससे न केवल देश की तकनीकी प्रगति में योगदान हो, बल्कि बालोतरा व आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकें।

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