बाड़मेर सरहदी जिले बाड़मेर की एक बहू ने सफलता की नई मिसाल पेश करते हुए न्यायिक सेवा में स्थान हासिल किया है। जालीपा निवासी दीपू कंवर ने गुजरात न्यायिक सेवा परीक्षा में 79वीं रैंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे राजस्थान का नाम रोशन किया है। दीपू को यह सफलता तीसरे प्रयास में मिली।
शादी के सात साल बाद सपना पूरा होने पर परिवार में खुशी का माहौल है। दीपू कंवर का कहना है कि इस उपलब्धि के पीछे उनके ससुराल वालों का बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर शादी के बाद जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई पीछे छूट जाती है, लेकिन उनके ससुराल वालों ने हमेशा उन्हें जज बनने के लिए प्रेरित किया।
गुजरात में जन्मीं दीपू कंवर की शादी वर्ष 2019 में लोकेंद्र सिंह के साथ हुई थी। उस समय वह एलएलबी द्वितीय वर्ष की छात्रा थीं। शादी के बाद पति, सास और ससुर ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया और घर के कामकाज से भी पूरी तरह मुक्त रखा, जिससे वह अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकीं।
पति और ससुराल के सहयोग से दीपू ने पहले एलएलबी और फिर एलएलएम की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने घर में ही एक कमरे को पीजी की तरह तैयार कर दिन-रात गुजरात न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी की। दीपू बताती हैं कि उनके ससुर उनकी पढ़ाई को लेकर इतने गंभीर थे कि अगर उन्हें कभी घर का काम करते देख लेते तो परिवार के अन्य सदस्यों को डांट देते थे।
गुजरात न्यायिक सेवा परीक्षा देने के लिए प्रैक्टिसिंग एडवोकेट होना जरूरी होता है। इसी कारण वर्ष 2021 से उन्होंने कोर्ट में प्रैक्टिस के साथ-साथ तैयारी शुरू की। वर्ष 2022 में पहले प्रयास में उन्होंने प्री और मेंस परीक्षा पास कर ली, लेकिन इंटरव्यू में चयन नहीं हो पाया। इसके बाद 2023 में दूसरे प्रयास में मेंस परीक्षा ही क्लियर नहीं हो सकी। अंततः वर्ष 2025 में तीसरे प्रयास में उन्होंने 79वीं रैंक हासिल कर सफलता प्राप्त की।
दीपू कंवर ने बताया कि जिस दिन रिजल्ट आया, वह अपने पीहर में थीं। परिणाम देखते ही वह अपने पिता के साथ सीधे बाड़मेर स्थित ससुराल पहुंचीं और परिवार को यह खुशखबरी दी। इसके बाद से ससुराल में खुशी का माहौल है और रिश्तेदार लगातार बधाई देने पहुंच रहे हैं।
दीपू के पति लोकेंद्र सिंह भी जयपुर से एलएलबी की पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों की एक पांच साल की बेटी भी है। पति के सुझाव पर ही दीपू ने एलएलबी की पढ़ाई शुरू की थी, जिसे उन्होंने केपी शाह लॉ कॉलेज, जामनगर से पूरा किया।
दीपू कंवर की सास समद कंवर बताती हैं कि शादी के बाद ही उन्होंने बहू से कह दिया था कि घर के काम करने के लिए परिवार में बहुत लोग हैं, इसलिए वह पढ़ाई पर ध्यान दें और जज बनें। बहू ने भी परिवार के इस सपने को साकार कर दिखाया।
