तिलवाड़ा मंडल में विराट हिंदू सम्मेलन : समाज की एकता, संस्कृति और समरसता का गूंजा संदेश

Narpat Mali
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बालोतरा। क्षेत्र में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और हिंदू एकता को सशक्त स्वरूप देने के उद्देश्य से रविवार को तिलवाड़ा मंडल पर विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। तिलवाड़ा, बोरावास, खेड़, कलावा, थान मलीनाथ, जोगेश्वर, जैतेश्वर सहित मंडल के प्रमुख गांवों से बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित हुए।

सुबह से ही सम्मेलन स्थल पर उत्साह, उमंग और आध्यात्मिकता का वातावरण छाया रहा। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे समाजजन, महिलाओं की बढ़ी हुई सहभागिता और युवाओं की सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं संतों के आशीर्वाद के साथ हुआ, जिससे पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।

मुख्य अतिथि सेवानाथ महाराज भड़कोट मठ महंत ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता समाज की एकजुटता है। उन्होंने कहा कि सभी वर्ग ‘एक जाजम’ पर बैठकर आपसी मतभेद भूलें और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारें। श्रीराम के जीवन से त्याग, मर्यादा, कर्तव्य और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का सीख लेते हुए समाज को सशक्त बनाने का संदेश दिया।

सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण का संदेश 

मुख्य वक्ता सुरेश चितारा, प्रांत मंत्री संस्कार भारती, ने समाज में सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तिलवाड़ा मंडल में हिंदू समाज की यह एकजुटता आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरक सिद्ध होगी। उन्होंने अपने संबोधन में ‘पंच परिवर्तन’—सामाजिक समरसता, स्वावलंबन, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक जागरण और नागरिक कर्तव्यों—की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि सामूहिक सहभागिता से ही समाज का संपूर्ण विकास संभव है।

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साधु संतों का सानिध्य  

कार्यक्रम में गुलाब पुरी गोस्वामी थान मल्लिनाथ, संतोष नाथ, धर्माराम महाराज जोगेश्वर महादेव, गोपाल राज मेघ धारू मंदिर, हरिओम गिरी सहित अनेक संत-महात्माओं का पावन सानिध्य मिला। संतों ने समाज को धर्म, सेवा और संस्कारों के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता और उसके संस्कारों में निहित होती है।

विशेष रूप से बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं और युवाओं ने कार्यक्रम में नई ऊर्जा का संचार किया। महिलाओं की अनुशासित उपस्थिति ने सामाजिक व सांस्कृतिक चेतना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया, जबकि युवा वर्ग ने समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया।

आयोजन के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने सांस्कृतिक संरक्षण, सामाजिक एकता और राष्ट्रहित के मुद्दों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी संत-महात्माओं, अतिथियों एवं उपस्थित समाजबंधुओं का आभार व्यक्त किया। पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन सोहन गहलोत द्वारा किया गया।

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