निःशुल्क भोजनशाला का समापन सेवा, समर्पण एवं आस्था का भव्य उदाहरण

Narpat Mali
6 Min Read

मरू-गंगा लूणी के पुनर्जागरण का आह्वान संकल्प लेकर जल लाने वाला ही होगा मालाणी का ‘भागीरथ’ :- गणेश पूरी महाराज

तिलवाड़ा | बालोतरा।  विश्वविख्यात श्री मल्लीनाथ पशु मेले के दौरान पधारे पशुपालकों एवं श्रद्धालु भक्तगणों हेतु श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, थान मल्लीनाथ तिलवाड़ा परिसर में श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल द्वारा संचालित निःशुल्क भोजनशाला का विधिवत समापन सम्पन्न हुआ।

निःशुल्क भोजनशाला का समापन सेवा, समर्पण एवं आस्था का भव्य उदाहरण 1002190192
पुजा अर्चना

यह समापन समारोह पंच दशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली एनसीआर संत महामंडल के अध्यक्ष एवं श्री दूधेश्वर महादेव मंदिर, गाजियाबाद के महंत‌ नारायणगिरी‌ महाराज, महंत गणेशपुरी महाराज (एकलिया हनुमान जी मंदिर, खाखरड़ा, द्वारका गुजरात) के पावन सानिध्य में तथा श्री रावल मल्लीनाथ जी के वंशज, उनके 25वें गादीपति, श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा एवं श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल के अध्यक्ष श्री रावल किशन सिंह जी जसोल के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।

यह निःशुल्क भोजनशाला 15 मार्च से 20 मार्च 2026 तक कुल 06 दिवस तक निरंतर संचालित रही, जिसमें लगभग 30,000 पशुपालकों एवं श्रद्धालु भक्तों ने महाप्रसादी ग्रहण कर धर्म एवं पुण्य लाभ प्राप्त किया।

निःशुल्क भोजनशाला का समापन सेवा, समर्पण एवं आस्था का भव्य उदाहरण 1002190177
….

समापन अवसर पर श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, थान मल्लीनाथ (तिलवाड़ा), श्री राणी रूपादे जी मंदिर, पालिया (तिलवाड़ा) तथा श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, मालाजाल (तिलवाड़ा) में विशेष रूप से महाप्रसादी भोग अर्पित किया गया। तत्पश्चात तिलवाड़ा, बोरावास एवं थान मल्लीनाथ की सर्व समाज की कन्याओं का विधिवत पूजन कर उन्हें फल-प्रसाद एवं अन्न-प्रसाद प्रदान कर दक्षिणा भेंट की गई। इसके उपरांत श्रद्धालु भक्तों तथा तिलवाड़ा, बोरावास एवं थान मल्लीनाथ के प्रत्येक घर में महाप्रसादी का वितरण किया गया।

निःशुल्क भोजनशाला का समापन सेवा, समर्पण एवं आस्था का भव्य उदाहरण 1002190224
कन्या भोजन प्रसादी

इस अवसर पर महंत  नारायणगिरी महाराज ने अपने में कहा कि “सनातन धर्म में अन्नदान को महादान कहा गया है। जो व्यक्ति अथवा संस्था अन्न सेवा करती है, वह सीधे-सीधे भगवान की सेवा करती है। तिलवाड़ा में संचालित यह निःशुल्क भोजनशाला करुणा, सेवा और समर्पण का पवित्र यज्ञ है। ऐसे आयोजनों से समाज में आपसी प्रेम, सहयोग और एकता की भावना सुदृढ़ होती है। संतों के सानिध्य में किया गया यह कार्य अत्यंत पुण्यदायी है और इससे समाज को एक सकारात्मक दिशा मिलती है। मैं इस पावन कार्य से जुड़े सभी सेवादारों, आयोजकों और सहयोगियों को साधुवाद देता हूं और कामना करता हूं कि यह सेवा निरंतर इसी प्रकार चलती रहे।”

निःशुल्क भोजनशाला का समापन सेवा, समर्पण एवं आस्था का भव्य उदाहरण 1002190240
कन्या पूजन

इस अवसर पर महंत गणेशपुरी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि “श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, थान मल्लीनाथ तिलवाड़ा में भोग अर्पित करते समय श्री रावल मल्लीनाथ जी से प्रार्थना की गई कि समस्त मनुष्य, पशु-पक्षी निरोग, स्वस्थ एवं सुखी रहें तथा सम्पूर्ण मालाणी क्षेत्र में समृद्धि और मंगलभावना बनी रहे। मालाणी क्षेत्र की जीवनधारा लूणी नदी, जिसे इस मरुभूमि की मरू-गंगा कहा जाता है, उसे बारहमासी बनाने का संकल्प समाज को सामूहिक रूप से लेना चाहिए। यह केवल जल का विषय नहीं, बल्कि इस क्षेत्र के अस्तित्व, कृषि, पशुधन और जनजीवन से जुड़ा हुआ एक महत्त्वपूर्ण संकल्प है।

निःशुल्क भोजनशाला का समापन सेवा, समर्पण एवं आस्था का भव्य उदाहरण 1002190218
भोजन प्रसादी वितरीत

जो भी इस संकल्प के साथ लूणी नदी में जल लाने का कार्य करेगा, वह निश्चय ही मालाणी क्षेत्र का ‘भागीरथ’ कहलाएगा। ऐसे पुण्य कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर सिद्ध होंगे और समाज को नई दिशा प्रदान करेंगे।”

इस अवसर पर रावल किशन सिंह जसोल ने अपने वक्तव्य में कहा कि “अन्न सेवा सनातन संस्कृति की आत्मा है। जब कोई व्यक्ति भूखे को भोजन कराता है, तो वह केवल शरीर की आवश्यकता पूरी नहीं करता, बल्कि ईश्वर की सच्ची उपासना करता है। तिलवाड़ा की इस पावन धरा पर श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल द्वारा संचालित यह निःशुल्क भोजनशाला हमारी परंपराओं, संस्कारों और सेवा भाव का जीवंत उदाहरण है। हमारा सतत प्रयास रहता है कि मेले में आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु, पशुपालक एवं अतिथि सम्मानपूर्वक भोजन प्राप्त करे और संतुष्टि के साथ यहां से जाए। यह सेवा समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी और समर्पण का प्रतीक है। भविष्य में भी इस प्रकार की सेवाएं और अधिक व्यापक रूप में संचालित होती रहेंगी।”

निःशुल्क भोजनशाला का समापन सेवा, समर्पण एवं आस्था का भव्य उदाहरण 1002190212
दर्शन लाभ

इस अवसर पर श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान जसोल के समिति सदस्य, प्रवक्ता एवं श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान तिलवाड़ा के प्र. उपाध्यक्ष कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल, श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान तिलवाड़ा के सचिव सुमेरसिंह वरिया, समिति सदस्य प्रवीण सिंह टापरा, शंभू सिंह असाड़ा, भीम सिंह टापरा, गुमानसिंह वेदरलाई, हनुवंत सिंह नौसर, जसवंत सिंह कालेवा, श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान जसोल के सचिव गजेंद्र सिंह जसोल, समिति सदस्य मांग सिंह जागसा, पूंजराजसिंह वरीया, सुरजभान सिंह दाखा, गणपतसिंह सिमलिया एवं मोहन भाई पंजाबी, जोगसिंह, भूपतसिंह असाड़ा, भगवानसिंह जागसा, कुंवर प्रवीणसिंह टापरा, नागसिंह सिमालिया, शिक्षक जितेंद्र सिंह तिलवाड़ा, राजेन्द्र सिंह उमरलाई, गिरधरसिंह केसुम्बला, नरपतसिंह नौसर सहित मालाणी क्षेत्र के प्रबुद्धजन एवं सैकड़ों श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित रहे।

Share This Article