बालोतरा। प्रसिद्ध श्री मल्लीनाथ तिलवाड़ा पशु मेले में रविवार को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में लोक संस्कृति, भक्ति संगीत, लोक नृत्य और पारंपरिक झांकियों के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद श्री मल्लीनाथ जी के भजनों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। मंच पर कलाकारों ने कालबेलिया नृत्य, कच्छी घोड़ी नृत्य, भवाई नृत्य, गुजर नृत्य तथा पंजाबी सांग जैसी विभिन्न लोक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।

कार्यक्रम के दौरान राधा-कृष्ण झांकी रासलीली, शिव-पार्वती झांकी तथा बाबा रामदेव जी की झांकी – सुगणा री पुकार भी आकर्षण का केंद्र रही। वहीं फूलों की होली की प्रस्तुति ने माहौल को उत्साह और रंगों से सराबोर कर दिया। कलाकारों ने देशभक्ति गीतों व लोक गीतों की प्रस्तुतियों से भी दर्शकों में जोश भर दिया। इसके अलावा बहुरूपिया कलाकारों ने जोकर, बंदर व अन्य रूप धारण कर अपनी कला का प्रदर्शन किया। ढोल वादन, मशक वादन तथा तारों की धुनों ने कार्यक्रम में अलग ही रंग भर दिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्थानीय लोक कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा और लोक नृत्यों के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
इस कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन विभाग एवं जल प्रदूषण निवारण इकाई के सहयोग से किया गया, जबकि प्रस्तुतियां मालाणी लोक कला संस्थान, लक्ष्य संस्थान, जैसलमेर एवं बाबा रामदेव गैर मंडल, घासी समाज के कलाकारों द्वारा दी गई।

तिलवाड़ा मेले में आयोजित इन रंगारंग प्रस्तुतियों से मेले में आए श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने भरपूर आनंद लिया और पूरा परिसर देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा।
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