सिणधरी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास में सोमवार शाम को 62 शिक्षार्थिनी प्रभावित होने वाली एक गंभीर घटना सामने आई। छात्राओं ने वार्डन, वार्डन की बहन व हॉस्टल गार्ड पर मारपीट, प्रताड़ना और भोजन न देने के आरोप लगाए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन, शिक्षा विभाग और पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।
घटनाक्रम और छात्राओं के आरोप
सोमवार शाम के बाद अचानक छात्राओं का एक बड़ा समूह रोते-चिल्लाते छात्रावास से बाहर निकला। मौके पर मौजूद ग्रामीणों और अन्य लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए मोबाइल वीडियो में कई छात्राएं भावुक और भयभीत दिखीं। छात्राओं ने आरोप लगाया कि वार्डन सुगनी देवी, उनकी बहन और एक गार्ड नियमित रूप से समय पर भोजन नहीं देते, छोटी-छोटी बातों पर प्रताड़ित करते और मारपीट करते हैं।
जानकारी अनुसार ये दुर्व्यवहार तब तेज हुआ जब बीटीएम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल सतपाल के स्थानांतरण के विरुद्ध छात्राओं ने एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपा, और इस जानकारी के तुरंत बाद वार्डन के व्यवहार में कड़कपन बढ़ गया। छात्राओं ने बताया कि वार्तालाप और ज्ञापन से संबंधित घटना के बाद कुछ लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ, जिससे वे परेशान होकर बाहर आ गईं और वीडियो वायरल हो गया।
प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होते ही स्थानीय प्रशासन एसडीएम सिणधरी एवं जिला शिक्षा अधिकारी देवाराम घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस टीम भी तत्काल मौके पर पहुंची और छात्राओं से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर छात्राओं को आश्वासन दिया और वापस छात्रावास भेजा।
जानकारी अनुसार, दो छात्राओं की तबीयत भय व तनाव के कारण बिगड़ने पर उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए CHC सिणधरी में भर्ती कराया गया, जहाँ उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
आरोपों पर वार्डन का पलटवार
वार्डन सुगनी देवी ने सभी आरोपों को गंभीर रूप से निराधार बताया। उनका कहना है कि “50-60 लड़कियों को दो लोग कैसे पीट सकते हैं?” वे इन तमाम आरोपों को अफवाह और मनगढ़ंत बता रही हैं और कहा कि छात्राओं के कुछ व्यवहारिक कारण और अंदरूनी गुटबाज़ी की वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
विद्यालय व ट्रांसफर का संदर्भ
छात्राएं बीटीएम राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल की छात्रा हैं। बताया गया कि हाल ही में विद्यालय के प्रिंसिपल सतपाल का स्थानांतरण किया गया है और छात्राओं व कुछ अभिभावकों ने इसका विरोध करते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था। सूत्रों के मुताबिक़, सतपाल सोमवार को ही रिलीव किए गए इस अनुक्रम ने छात्रावास के माहौल में उथल-पुथल बढ़ा दी।
यह सवाल उठता है कि क्या प्रशासन के निर्णय और स्थानांतरण की प्रक्रिया पारदर्शी रूप से कराई गई थी और क्या मौके पर मौजूद स्टाफ ने किसी प्रकार की अनुशासनहीनता दिखायी इन बिंदुओं की भी जांच आवश्यक है।

