जैसलमेर में टैंकों की गूंज: भारतीय सेना का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान को कड़ा संदेश,

Vikash Mali
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जैसलमेर – हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके जवाब में भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद उपजे भारत-पाक तनाव के बीच भारतीय सेना ने जैसलमेर के रेगिस्तान में विशाल और अत्याधुनिक युद्धाभ्यास कर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है। ‘साइलेंट सैंड, रोरिंग टैंक’ नामक इस अभ्यास के दौरान भारतीय सेना के टैंकों की गूंज मरुस्थल में दूर-दूर तक सुनाई दी, जिसने न केवल दुश्मन को चेतावनी दी बल्कि सेना की रणनीतिक तैयारी और युद्ध क्षमता को भी साबित किया।

इस अभ्यास में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित बैटल एक्स डिवीजन और कोणार्क कोर की यूनिट्स ने भाग लिया। भीषण गर्मी और दुर्गम रेगिस्तानी भू-भाग में टैंकों, तोपों और बख्तरबंद वाहनों के जरिए सटीक, तेज़ और प्रभावी फायर-पावर का प्रदर्शन किया गया। वीडियो फुटेज में टैंक तेज़ रफ्तार से दौड़ते हुए दुश्मन के ठिकानों पर निशाना साधते दिखाई दिए। सेना ने नाइट विजन के साथ रात में भी ऑपरेशन अभ्यास किया, जिसमें रैपिड मूवमेंट और लॉजिस्टिक्स की वास्तविक समय में परख की गई।

यह अभ्यास महज दिखावा नहीं था, बल्कि इसके पीछे पाकिस्तान को संदेश देना था। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने POK और पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक सैन्य संघर्ष चला। इस दौरान पाकिस्तान ने भारतीय सीमा में मिसाइल और ड्रोन हमले की कोशिश की, जिसे भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया। जवाबी कार्रवाई में भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस को भी तबाह कर दिया।

19 मई को थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जैसलमेर के लौंगेवाला पोस्ट का दौरा किया और अग्रिम मोर्चों पर तैनात जवानों से मुलाकात की। उन्होंने जवानों की वीरता, अटूट प्रतिबद्धता और देश के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें गर्व से ‘शाबाश!’ कहा।

सूत्रों के अनुसार, इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य भविष्य की सैन्य चुनौतियों से निपटने के लिए सेना की ऑपरेशनल तैयारी को परखना, स्वदेशी रक्षा तकनीकों का परीक्षण करना और आत्मनिर्भर भारत की सैन्य सोच को मजबूती देना रहा। यह अभ्यास न केवल भारतीय सेना की तकनीकी दक्षता और रणनीतिक लचीलापन का परिचायक बना, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि भारतीय सेना हर मौसम, हर भूगोल और हर चुनौती का सामना करने में पूर्ण रूप से सक्षम है।

इस पूरे अभ्यास ने यह साबित कर दिया कि भारत न केवल जवाब देने में सक्षम है, बल्कि भविष्य की किसी भी चुनौती का डटकर सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार भी है।

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