तिलवाड़ा में मारवाड़ी अश्व प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन, 700 वर्षों पुरानी परंपरा को मिला अंतरराष्ट्रीय विस्तार

Narpat Mali
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श्री रावल मल्लीनाथ जी पशु मेले में देश-विदेश से पहुंचे अश्व पालक, उत्कृष्ट अश्वों ने मोहा दर्शकों का मन

तिलवाड़ा | बालोतरा विश्वविख्यात एवं ऐतिहासिक श्री रावल मल्लीनाथ जी पशु मेला, तिलवाड़ा के पावन अवसर पर श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल एवं ऑल इंडिया मारवाड़ी हॉर्स सोसायटी, जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मारवाड़ी अश्व प्रतियोगिताओं का भव्य, सुव्यवस्थित एवं गरिमामय आयोजन सम्पन्न हुआ।

इस आयोजन में प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर से आए प्रतिष्ठित अश्व पालकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मारवाड़ी नस्ल के उत्कृष्ट, सुदृढ़ एवं आकर्षक अश्वों ने अपनी अद्भुत चाल, संतुलन, बनावट एवं शुद्धता का शानदार प्रदर्शन कर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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झंड़ा रोहण के साथ शुरू हुआ मेला

कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु डॉम/एरिना की उत्कृष्ट व्यवस्था श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल द्वारा की गई, जिसमें अश्वों, अश्व पालकों एवं दर्शकों के लिए छाया, बैठने, आवागमन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था रही। पूरे आयोजन में अनुशासन, सुगमता एवं भव्यता का विशेष वातावरण बना रहा।

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रावल मल्लीनाथ जी पूजा अर्चना

आयोजित प्रतियोगिताएं

प्रजनन योग्य घोड़ी (Brood Mare), बछेरियां (Milk Teeth), बछेरे (Milk Teeth), बछेरियां (Two Teeth), बछेरे (Two Teeth), नर घोड़े (Stallion), बेस्ट एनिमल

निर्णायकगण (जज)

पशुपालन विभाग से— डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. बाबूराम चौधरी, डॉ. सूरजाराम चौधरी तथा ऑल इंडिया मारवाड़ी हॉर्स सोसायटी, जोधपुर से— धनश्याम सिंह पाटोदी, आनंद सिंह देसू, अमित विक्रम सिंह जोजावर, धनंजय सिंह बीजापुर रहे।

वर्ष 2026 – विजेता

Brood Mare (घोड़ी वर्ग)

प्रथम : परी — मालिक मेघराजसिंह झुंझानी

द्वितीय : योगेश्वरी — मालिक ऋतुराज सिंह, रोहतक

तृतीय : सावित्री — मालिक वीराराम रणोदर, चितलवाना

अदंत बछेरी

प्रथम : लुना — रवि मेवाड़ा, सुमेरपुर

द्वितीय : राजसूगंध — कृष्णपाल सिंह, सर लूणी जोधपुर

तृतीय : भैरवी — सिद्धांत सिंह रांठिया, मेड़ता

अदंत बछेरा

प्रथम : रुझान — मालिक सरदारसिंह सोलंकी, पाटन भुज

द्वितीय : मेघताना — मालिक उमेदाबाद, जालोर

तृतीय : उकाब — मालिक सिद्दीकी भाई, अहमदाबाद

दो दांत बछेरी

प्रथम : सीरत — मालिक इंदरजीत सिंह, रणसी गाँव

द्वितीय : ओमिनी — मालिक रामसिंह, सिवाना

तृतीय : शिवानी — मालिक पहाड़सिंह, नैनावा गुजरात

दो दांत बछेरा

प्रथम : साहेब जादा — तनराज सिंह जोधा

द्वितीय : रघुराज — मालिक सहदेव भाई, मेहसाणा

तृतीय : ऊदल — एच.एस. राठौर, नागौर

Stallion (नर घोड़ा वर्ग)

प्रथम : अभि सुंदर — मालिक पहाड़सिंह, नैनावा गुजरात

द्वितीय : राजहंस — मालिक हरीदास, तमिलनाडु

तृतीय : गुरुदेव — गणेश गुर्जर

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विजेता किए भेंट

शो का सर्वश्रेष्ठ अश्व (Best Horse of the Show) परी — मालिक मेघराजसिंह झुंझानी, जालोर

कार्यक्रम के दौरान अश्व पालकों में विशेष उत्साह एवं गर्व की भावना देखने को मिली एवं बड़ी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति रही। विजेता प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार, आकर्षक ट्रॉफी एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस प्रतियोगिता में कुल 115 अश्वपालकों ने शामिल होकर भाग लिया। जिसमें दो दांत बछेरे 19 अश्व, दो दांत बछेरियां 07 अश्व, अदंत बछेरे 36 अश्व, अदंत बछेरियां 22 अश्व, प्रजनन योग्य घोड़ियां 10 अश्व तथा नर घोड़े 21 अश्व सम्मिलित रहे।

इस अवसर पर रावल किशन सिंह जसोल ने कहा कि— “यह मेला हमारी परंपरा एवं सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है तथा मारवाड़ी अश्व हमारी शौर्य परंपरा की पहचान हैं।”

उन्होंने कहा कि हम सभी इस मेले में एकत्रित हुए हैं। सर्वप्रथम मैं श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी को नमन करता हूँ। महाराजा जोधपुर गजसिंह साहब को इस कार्यक्रम में पधारना था, किंतु वे अपनी व्यस्तता के कारण पधार नहीं सके। आगामी मेले में महाराजा सा जोधपुर एवं महारानी सा अवश्य पधारेंगे।

इस आयोजन में ऑल इंडिया मारवाड़ी हॉर्स सोसायटी के अध्यक्ष कुंवर गजेंद्रपाल सिंह पोषाणा, सचिव इंद्रजीत सिंह नाथावत, बाड़मेर रावत त्रिभुवन सिंह, कुंवर हरीशचंद्र सिंह तथा विशेष रूप से मंच संचालन हेतु डॉ. रामेश्वरी चौधरी एवं दिलीप करण सिंह का मैं आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने उत्कृष्ट संचालन के माध्यम से इस कार्यक्रम को ऊँचाई प्रदान की।

मैंने इतनी बड़ी एवं उत्कृष्ट अश्व प्रतियोगिता पहले कभी नहीं देखी, जितनी इस वर्ष आयोजित हुई है। श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल की ओर से कुंवर हरीशचंद्र सिंह जसोल ने अत्यंत परिश्रम कर डॉम एरिना की व्यवस्था की, जिससे अश्वों, अश्व पालकों एवं दर्शकों को अत्यंत सुविधा प्राप्त हुई।

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प्रतियोगिता

सरकारी निर्णायकों एवं ऑल इंडिया मारवाड़ी हॉर्स सोसायटी, जोधपुर के निर्णायकों ने अत्यंत मेहनत एवं निष्पक्षता के साथ निर्णय दिए। जो अश्व पालक विजेता बने हैं, उन्हें मैं हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूँ। आपने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

पूर्व में इस मेले में राष्ट्रीय स्तर पर पशुपालक एवं मेलार्थी आते थे, किंतु अब यह मेला अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो गया है। दुबई से भी अश्व पालक यहाँ आए हैं और प्रतियोगिता में विजेता बने हैं। आज विदेशी दर्शक भी यहाँ उपस्थित हैं। उनमें से एक महिला दर्शक केरलाइन मूरी ने कहा कि वे विगत वर्षों से इस मेले में आ रही हैं। यह हम सभी के लिए गौरव की बात है।

यहां पर प्रेस एवं फोटोग्राफर भी बड़ी संख्या में यहाँ उपस्थित रहे। मैं आप सभी का भी आभार व्यक्त करता हूँ कि आपने इस प्रतियोगिता को व्यापक रूप से कवर किया और इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

मैं यह कहना चाहता हूँ कि यह मेला संतों का मेला रहा है। श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी ने लगभग सात सौ वर्ष पूर्व संत समागम के माध्यम से इस मेले की शुरुआत की थी। हमें श्री रावल मल्लीनाथ जी को कभी नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि यह मेला केवल पशुओं का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक परंपरा का भी प्रतीक है। उनके आध्यात्मिक मूल्यों को पुनर्जागरण करने के लिए यहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम, जागरण एवं भजन संध्या आयोजित की जा रही हैं। साथ ही मरूगंगा आरती के माध्यम से लूणी नदी — जिसे मरूगंगा कहा जाता है — की आरती की जाती है। श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी की असीम कृपा से आशा है कि लूणी नदी का पुनरुद्धार होगा और वह बारहमासी नदी के रूप में प्रवाहित होगी। आज स्थिति यह है कि कुछ असामाजिक तत्व इस नदी में अवैध खनन कर रहे हैं। यह बंद होना चाहिए तथा यहाँ पुनः हरियाली आए, वृक्षारोपण हो और खेती का विकास हो।

श्री रावल मल्लीनाथ जी के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने दिल्ली में भी वर्षा करवाई थी, जहाँ अकाल पड़ा था। मेवानगर में जहां वो विराजते थे वहां पर बारहों मास वर्षा होती थी। मेरी प्रार्थना है कि इस क्षेत्र में भी प्रकृति संतुलन बना रहे और अष्ट प्रकृति महायज्ञ के माध्यम से इसका संरक्षण हो।

श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, थान मल्लीनाथ (तिलवाड़ा) में मेले का शुभारंभ होता है, जहाँ मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण किया जाता है। इस मेले में प्लास्टिक निवारण हेतु कुंवर हरीशचंद्र सिंह जसोल ने एक सराहनीय पहल की है। प्रशासन एवं सीईटीपी ट्रस्ट बालोतरा तथा जसोल के सहयोग से यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रयास है।

मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि अश्व प्रतियोगिताएँ तो इस मेले का एक महत्वपूर्ण भाग हैं, किंतु श्री रावल मल्लीनाथ जी केवल संत ही नहीं, बल्कि एक महान शासक एवं वीर योद्धा भी थे। उनके सुपुत्र कुंवर जगमाल जी तथा उनके अश्व ‘गंगाजल’ का इतिहास भी अत्यंत गौरवशाली है। उन्होंने अपने जीवन में विधर्मियों के विरुद्ध पाँच युद्ध लड़े और सभी में विजय प्राप्त की। उनका सबसे बड़ा योगदान यह है कि आज हम सनातन धर्म का पालन कर पा रहे हैं। अन्यथा जो पराजित हुए, उनका धर्मांतरण हो गया। अतः श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं कुंवर जगमाल जी के योगदान को हमें सदैव स्मरण रखना चाहिए। अश्व भी उनकी परंपरा का प्रतीक हैं। इस क्षेत्र के अश्व एवं संस्कृति का पुनरुद्धार करना हमारा कर्तव्य है। यह मलाणी प्रदेश है, जिसका नाम श्री रावल मल्लीनाथ जी के नाम पर पड़ा है, और यहाँ की अश्व नस्ल ‘मालाणी नस्ल’ के रूप में प्रसिद्ध है। इस संस्कृति का संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार आवश्यक है।

महाराजा सा जोधपुर गजसिंह ने विगत 23 वर्षों से इस अश्व प्रतियोगिता का आयोजन प्रारंभ कर इस मेले को पुनर्जीवित किया है।

यहां पहले एक लाख पशु आते थे, वहाँ अब संख्या घटकर 15–20 हजार रह गई है।

इस मेले में ऑल इंडिया मारवाड़ी हॉर्स सोसायटी, जोधपुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मैं अपनी ओर से, श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान जसोल की ओर से, श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान तिलवाड़ा की ओर से तथा समस्त पशुपालकों एवं मेलार्थियों की ओर से आप सभी का हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ।

ऑल इंडिया मारवाड़ी हॉर्स सोसायटी, जोधपुर के अध्यक्ष गजेंद्र पाल सिंह पोषाणा ने कहा कि

“ऐसी प्रतियोगिताएं मारवाड़ी नस्ल के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह आयोजन न केवल श्रेष्ठ अश्वों के चयन का मंच है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम भी है। तिलवाड़ा का यह श्री रावल मल्लीनाथ पशु मेला मारवाड़ी नस्ल की वैश्विक पहचान को और अधिक सुदृढ़ कर रहा है।”

कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि श्री रावल मल्लीनाथ पशु मेला लगभग 700 वर्षों पुराना मेला है, जो राजस्थान के सबसे प्राचीन एवं ऐतिहासिक मेलों में से एक है। इस मेले के प्रति जन-जन की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि इस मेले की शुरुआत श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी ने गुरु उगमसी भाटी के पावन सानिध्य में आयोजित संत समागम से की थी। उस संत समागम में मेवाड़ से महाराणा कुम्भा एवं उनकी रानी, कच्छ-काठियावाड़ (गुजरात) से जैसल एवं उनकी रानी तोरल, तथा श्री बाबा रामदेव जी सहित अनेक संत-महात्मा पधारे थे। उसी संत समागम से इस मेले की पावन परंपरा का प्रारंभ हुआ, जो कालांतर में श्री रावल मल्लीनाथ पशु मेला के रूप में विकसित होकर विश्वविख्यात बना।

उन्होंने कहा कि यह मेला निरंतर लूणी नदी के पावन तट पर एवं लूणी नदी में आयोजित होता हुआ आ रहा है। कोरोना काल एवं पशुपालकों की घटती भागीदारी के चलते मेले में कुछ गिरावट आई, किंतु जोधपुर दरबार द्वारा विगत 20 वर्षों से अधिक समय से ऑल इंडिया मारवाड़ी हॉर्स सोसायटी, जोधपुर के माध्यम से इस मेले को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही, जसोल रावल साहब किशन सिंह — जो श्री रावल मल्लीनाथ जी के वंशज, 25वें गादीपति तथा संबंधित संस्थानों के अध्यक्ष हैं — के मार्गदर्शन में इस मेले के पुनर्जीवन हेतु निरंतर सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह मेला “छत्तीस कौम” की सामाजिक समरसता का प्रतीक है और इसे जीवित रखना हम सभी का दायित्व है। विगत पाँच वर्षों से इसी भावना के साथ निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल द्वारा थान मल्लीनाथ (तिलवाड़ा) परिसर में निःशुल्क भोजनशाला संचालित की जाती है, जहाँ भव्य मंगला आरती एवं अष्ट प्रकृति महायज्ञ के पश्चात सर्व समाज एक ही पंडाल में प्रसादी ग्रहण करता है।

अश्व, पशुपालकों एवं दर्शकों की सुविधा हेतु संस्थान द्वारा डॉम/एरिना सहित विभिन्न व्यवस्थाएँ की गई हैं, जिससे इस वर्ष अश्व, ऊंट एवं श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जोधपुर दरबार के मार्गदर्शन में इस मेले में निष्पक्ष मूल्यांकन (जजिंग) की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है, जो अब इसकी विशेष पहचान बन चुकी है।

अश्व प्रेमियों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि एक सच्चे अश्व प्रेमी के लिए उसके अश्व का मूल्य धन से अधिक उसके परिश्रम और लगाव में निहित होता है। इस मेले में विजेता बनने पर पूरे देश में विशिष्ट पहचान प्राप्त होती है, जो किसी भी आर्थिक मूल्य से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

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सैकड़ों लोग रहें मोजूद

आगंतुकों को संदेश

उन्होंने कहा कि हमारी योजना एवं निरंतर प्रयास यही है कि प्रत्येक वर्ष यहां सुविधाओं में बढ़ोतरी हो तथा व्यवस्थाएं और अधिक सुदृढ़ एवं बेहतर बनती रहें। आगामी श्री रावल मल्लीनाथ पशु मेला 2027 के लिए हमारा विशेष प्रयास है कि, जैसे विगत श्री रामदेव जी मेला, रामदेवरा में सक्षम संस्थान द्वारा भव्य नेत्र कुंभ का आयोजन किया गया था, उसी प्रकार तिलवाड़ा में भी इसका आयोजन किया जाए।

इस संदर्भ में सक्षम संस्थान से हमारी निरंतर वार्ता जारी है। रामदेवरा में आयोजित नेत्र कुंभ के दौरान सक्षम संस्थान के चंद्रशेखर जी द्वारा तिलवाड़ा में भी इस प्रकार के आयोजन की घोषणा की गई थी, और वे इस दिशा में पूर्ण रूप से प्रयासरत हैं। हमें पूर्ण आशा एवं विश्वास है कि आगामी वर्ष आयोजित होने वाले श्री रावल मल्लीनाथ पशु मेला, तिलवाड़ा में नेत्र कुंभ के माध्यम से आमजन को भव्य स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त होगा।

उपस्थित गणमान्यजन

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ये रहें उपस्थित

इस दौरान गुडा राणा सुरेंद्रसिंह, बाड़मेर रावत त्रिभुवन सिंह, कोटड़ा राणा नरेंद्र प्रताप सिंह, उपखण्ड अधिकारी बालोतरा अशोक कुमार बिश्नोई, पुलिस उप अधीक्षक बालोतरा अनिल राजपुरोहित, भामाशाह जोगेंद्रसिंह चौहान, रतन सिंह बाखासर, मोहनसिंह चितलवाना, स्वरूपसिंह खारा, गिरधरसिंह कोटड़ा, सुनीता भाटी सहित छत्तीशी कौम के प्रबुद्धजन, पशुपालक एवं हजारों की संख्या में मेलार्थी श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

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