नन्हें–मुन्ने दूल्हों की ढूंढ एवं गेर नृत्य से गूँजा बोरावास गांव
बालोतरा/तिलवाड़ा। रंगों का प्रमुख पर्व होली बोरावास गांव में पारंपरिक रीति–रिवाजों और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पंडित सत्यानारायण दवे द्वारा निर्धारित शुभ मुहूर्त में ठा. नारायण सिंह ने विधिवत पूजा-अर्चना करते हुए होलिका दहन किया।

होलिका दहन के पश्चात देर रात तक गांव में चंग की थाप और फागुनी गीतों की गूँज छाई रही। गेरिये चंग लेकर घर–घर नन्हें–मुन्ने दूल्हों की ढूंढ के लिए पहुंचे तथा बच्चों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की।

गांव में चारों ओर उत्साह का विशेष माहौल रहा। ग्रामीण रातभर चंग बजाते हुए फाल्गुनी उमंग में डूबे नजर आए। वहीं महिलाओं ने ‘लूर’ लेकर लोकगीतों की धुन पर थिरकते हुए पारंपरिक रस्में निभाईं।
बुधवार को धुलंडी के अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं। विभिन्न समाजों द्वारा नौनिहालों की ढूंढ का आयोजन किया गया। राजस्थान की लोक संस्कृति का प्रतीक गेर नृत्य भी आकर्षण का केंद्र रहा। गांव में होली का उत्सव भाईचारे, स्नेह और सामाजिक समरसता के साथ बड़े धूमधाम से मनाया गया।

