बालोतरा जसोल। श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल का इतिहास इस बुधवार एक और अविस्मरणीय अध्याय से समृद्ध हो गया जब जगतगुरू गर्गाचार्य महेंद्रानंद गिरी महाराज का प्रथम बार जसोलधाम में पधारना हुआ।
उनके पावन चरण जसोल की पवित्र भूमि पर पड़ते ही वातावरण धर्म, भक्ति और उत्साह से भर उठा।
मंदिर संस्थान की ओर समिति सदस्य कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल एवं संस्थान सचिव गजेन्द्र सिंह जसोल सहित प्रबुद्धजनों एवं श्रदालुओं ने भव्य स्वागत, मंगल ध्वनि, पुष्पवर्षा से महाराज का भव्य अभिनंदन किया।

महाराज ने श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाईसिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी तथा श्री काला-गौरा भैरूजी के मंदिरों में विधिवत दर्शन-पूजन कर समस्त भक्तजनों, धर्मावलंबियों एवं राष्ट्र के कल्याण की मंगलकामनाएँ कीं।

अपने आशीर्वचन में महाराज ने कहा “जसोलधाम में यह मेरा प्रथम आगमन है। यहाँ की भूमि में अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा विद्यमान है। श्रद्धालुओं की आस्था, मंदिर संस्थान की अनुशासित व्यवस्था और सेवा भावना अतुलनीय है। यहाँ आकर आत्मा को जो शांति और आनंद प्राप्त हुआ, वह शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।”
अन्नपूर्णा प्रसादम एवं छप्पन भोग का पावन आयोजन
इस पावन दिवस पर अन्नपूर्णा प्रसादम का लाभ स्वर्गीय मल्लाराम एवं भूराराम, लक्ष्मणराम सुपुत्र नेनू देवी – स्वर्गीय खीमाराम देवासी (निवासीः भाखरपुरा, तहसील गुड़ामालानी, जिला बाड़मेर) द्वारा लिया गया।

लाभार्थी परिवार ने मंदिर प्रांगण स्थित समस्त देवालयों में विधिपूर्वक भोग अर्पण कर दर्शनार्थ पधारे भक्तों में धर्मभावपूर्वक प्रसाद वितरण किया।
वहीं गुरुवार को छप्पन भोग एवं अन्नपूर्णा प्रसादम का लाभ माजीसा मां एवं भीखमचंद जी लूनिया (बापजी खैरगढ़ थान) के आशीर्वाद से सुनीता बाघरेचा, धर्मपत्री दिलीप बाघरेचा, तथा सुपुत्र मोहित बालाघाट (मध्य वाघरेचा एवं मधुर वाघरेचा, निवासी आसोप (जोधपुर, राजस्थान), हाल निवास प्रदेश) द्वारा लिया गया।

लाभार्थी परिवार ने मंदिर प्रांगण स्थित समस्त देवालयों में अन्न पूर्णा प्रसादम एवं छप्पन व्यंजनों का भव्य भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमियों में प्रसाद वितरण किया।
इस दौरान लाभार्थी परिवारों ने जसोल नगर पालिका सर्व समाज की कन्याओं का विधिवत पूजन किया। कन्याओं को फल-प्रसाद, अन्न-प्रसादम करवाकर उन्हें दक्षिणा भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया।
मंदिर संस्थान परिसर में दिनभर भक्ति, सेवा और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

