जैसलमेर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र स्थित पारेवर गांव के वंडर सीमेंट प्लांट में बुधवार सुबह एक मामूली विवाद ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया। एक सुपरवाइजर द्वारा मजदूर को थप्पड़ मारने के आरोप के बाद हजारों श्रमिकों का गुस्सा फूट पड़ा। विरोध प्रदर्शन ने कुछ ही समय में हिंसक रूप धारण कर लिया, जिसके चलते प्लांट परिसर में तोड़फोड़, मारपीट और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मौके पर पहुंची पुलिस को भी भीड़ के दबाव में पीछे हटना पड़ा।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना की शुरुआत तब हुई जब एक मजदूर को कथित रूप से साइट पर जाने से रोका गया। रामगढ़ थाना प्रभारी भुट्टा राम विश्नोई ने बताया कि सुपरवाइजर ने सुरक्षा या कार्य अनुशासन के चलते मजदूर को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान दोनों के बीच कहासुनी हुई जो जल्द ही हाथापाई में बदल गई। आरोप है कि इसी दौरान सुपरवाइजर ने मजदूर को थप्पड़ जड़ दिए।
यह घटना प्लांट में मौजूद अन्य श्रमिकों तक तेजी से पहुंची। मजदूरों ने इसे अपमानजनक व्यवहार मानते हुए विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या हजारों में बदल गई और पूरा प्लांट परिसर नारों और आक्रोश से गूंज उठा।
विरोध ने लिया उग्र रूप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मजदूरों का गुस्सा अचानक फूट पड़ा। कुछ ही मिनटों में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। आक्रोशित श्रमिकों ने प्लांट परिसर में मौजूद अधिकारियों और स्टाफ के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी। कई अधिकारी अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिपते नजर आए।
मजदूरों ने गार्ड्स के केबिन, कार्यालयों के कांच, दरवाजे, फर्नीचर और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। प्लांट में लगी कुछ महंगी मशीनों को भी क्षति पहुंचने की बात सामने आई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में श्रमिकों को प्लांट की खिड़कियां तोड़ते और सामान फेंकते हुए देखा जा सकता है।
पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण हालात
घटना की सूचना मिलते ही रामगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन हालात पहले से ही बेकाबू हो चुके थे। हजारों की संख्या में मौजूद श्रमिकों के सामने पुलिस बल बेहद कम था। भीड़ के आक्रामक रुख को देखते हुए पुलिसकर्मियों को अपनी सुरक्षा के मद्देनजर पीछे हटना पड़ा।
बताया जा रहा है कि कुछ पुलिसकर्मियों को भी भीड़ ने दौड़ा लिया। मजदूरों के हाथों में लाठी-डंडे थे और माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की गई।
चार थानों की फोर्स तैनात
हालात को काबू में लाने के लिए सदर थाना, सम थाना, रामगढ़ और कोतवाली सहित चार थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। अतिरिक्त बल के पहुंचने के बाद स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आई। फिलहाल पूरे प्लांट परिसर और आसपास के क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है और अधिकारी हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
थाना प्रभारी ने बताया कि श्रमिकों की संख्या अत्यधिक थी, जबकि प्रारंभिक स्तर पर पुलिस बल सीमित था। ऐसे में किसी बड़े हादसे से बचने के लिए रणनीतिक रूप से पीछे हटना पड़ा। बाद में पर्याप्त बल आने पर हालात को संभाला गया।
प्रबंधन की चुप्पी और बढ़ता तनाव
घटना के बाद से प्लांट प्रबंधन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मजदूरों की नाराजगी को गंभीरता से लिया जाता तो हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते। सुपरवाइजर पर लगे आरोपों और मजदूरों के आक्रोश ने आग में घी का काम किया।
जैसलमेर के औद्योगिक परिदृश्य में यह घटना एक बड़े श्रमिक आंदोलन के रूप में देखी जा रही है। इतने बड़े स्तर पर श्रमिकों का एकजुट होकर उग्र प्रदर्शन करना क्षेत्र के लिए असामान्य माना जा रहा है।
ग्रामीणों में दहशत
प्लांट के आसपास स्थित गांवों में भी इस घटना को लेकर दहशत का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सुबह से ही शोर-शराबा और भगदड़ जैसी स्थिति बनी रही। कई लोग अपने घरों से बाहर निकलने से भी कतराते नजर आए।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और वीडियो फुटेज खंगाले जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल प्लांट में कामकाज प्रभावित हुआ है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। आने वाले दिनों में प्रबंधन और मजदूर संगठनों के बीच वार्ता की संभावना जताई जा रही है ताकि स्थिति सामान्य हो सके।

