बालोतरा। जसोल. राजस्थान के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिदृश्य में जसोल की अपनी विशेष पहचान है। यह नगर परंपरा और श्रद्धा का केन्द्र रहा है। अब जसोल आने वाले पचास वर्षों (2025–2075) में एक नए परिवर्तन की ओर अग्रसर हो रहा है। इस दृष्टि-पत्र में विकास की ऐसी रूपरेखा रखी गई है जो हर नागरिक को सहभागी बनने का अवसर देती है। उद्देश्य है कि जसोल को जीवन-योग्य, समृद्ध और विकसित एवं मजबूत बनाया जाए।
जसोलधाम : आध्यात्मिकता और विकास का केन्द्र
जसोलधाम आस्था और श्रद्धा का प्रमुख स्थल है। आने वाले वर्षों में यह स्थान धार्मिक पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान का मुख्य आधार बनेगा। तीर्थ-मार्ग का विकास किया जाए, आधुनिक धर्मशालाएँ बनाई जाएं, प्रसाद उद्योग और स्मृति-चिन्ह निर्माण से रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं। वार्षिक मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से पर्यटन का प्रवाह पूरे वर्ष बना रहे तथा धरोहर संरक्षण से परंपरा और पहचान सुरक्षित रखी जाए।
आधारभूत संरचना और यातायात
जसोल के विकास के लिए मजबूत बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता है। चौड़ी सड़कें, बाईपास मार्ग और आपातकालीन कनेक्टिविटी विकसित की जाए। पैदल और साइकिल मार्ग बनाए जाएं। नियमित बस रूट और क्षेत्रीय यातायात सुविधाओं से नगर को आसपास के बड़े केंद्रों से जोड़ा जाए। स्थानीय उत्पादों के लिए लॉजिस्टिक हब और पैकिंग केंद्र स्थापित किए जाएं, जिससे व्यापार में सुगमता लाई जाए।
जल प्रबंधन और कृषि सुधार
जल संरक्षण इस दृष्टि का अहम हिस्सा है। वर्षाजल संचयन, तालाबों एवं उसके आगोरों और नाडियों का जीर्णोद्धार किया जाए। किसानों के लिए आधुनिक सिंचाई पद्धतियाँ अपनाई जाएं। भंडारण और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित की जाएं, जिससे पैदावार का उचित मूल्य मिल सके।
उद्योग, उद्यमिता और रोजगार
स्थानीय स्तर पर हस्तशिल्प, कृषि-आधारित उद्योग और लघु इकाइयों को बढ़ावा दिया जाए। युवाओं और महिलाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएं। ऋण सहायता और ई–कॉमर्स से जुड़ने की व्यवस्था की जाए। स्वयं सहायता समूहों और स्टार्टअप को प्रोत्साहन दिया जाए।
शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाएँ
शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक विद्यालय, तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान और खेल सुविधाएँ विकसित की जाएं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सामुदायिक अस्पताल, आपातकालीन केंद्र और ट्रॉमा सेंटर की स्थापना की जाए। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अंतर्गत वृद्ध, दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विशेष सहयोग दिया जाए।
हरित ऊर्जा और पर्यावरण
जसोल को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सौर संयंत्र स्थापित किए जाएं और नेट मीटरिंग प्रणाली से सभी को जोड़ा जाएं। अपशिष्ट प्रबंधन, कम्पोस्टिंग और रिसायक्लिंग को अपनाया जाए। शहरी हरित क्षेत्र, पार्क और नदी किनारे वृक्षारोपण पर विशेष ध्यान दिया जाए।
स्मार्ट और डिजिटल जसोल
डिजिटल तकनीक से नगर प्रशासन को सशक्त बनाया जाए। नागरिक सेवाओं का डिजिटलीकरण किया जाए। सार्वजनिक वाई-फाई, डिजिटल साक्षरता अभियान और डेटा आधारित योजना तैयार की जाए। इससे पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित की जाए।
नगर पालिका विकास और नागरिक सुविधाएँ
जसोल नगर के समग्र विकास के लिए नगर पालिका की ओर से निम्न योजनाएँ प्रस्तावित की जाएं :
सड़क और यातायात : मुख्य सड़कों का चौड़ीकरण, आंतरिक गलियों का CC रोड निर्माण, पैदल पथ, साइकिल ट्रैक, बाईपास मार्ग और नगर प्रवेश द्वार बनाए जाएं।
जल आपूर्ति और ड्रेनेज : प्रत्येक घर तक शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जाए, पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार किया जाए, वर्षा जल संचयन की व्यवस्था की जाए।
स्वच्छता और कचरा प्रबंधन : डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, आधुनिक डंपिंग यार्ड, गीले–सूखे कचरे का अलग निपटान किया जाए, सार्वजनिक शौचालय और स्वच्छता केंद्र विकसित किए जाएं।
विद्युत और ऊर्जा : LED और सौर स्ट्रीट लाइट्स लगाई जाएं, सोलर रूफटॉप पैनल लगाए जाएं, भूमिगत बिजली लाइनें डाली जाएं और भवनों को ऊर्जा दक्ष बनाया जाए।
नगर सौंदर्यकरण : चौक-चौराहों का आकर्षक सौंदर्यकरण किया जाए, फव्वारे, भित्तिचित्र, पार्क और बगीचों का विकास किया जाए।
शिक्षा और ज्ञान : स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र और प्रतियोगी परीक्षा सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं और जसोल के गौरवशाली इतिहास का संग्रहालय स्थापित किया जाए।
स्वास्थ्य और कल्याण : मोबाइल क्लिनिक, महिला एवं बाल स्वास्थ्य केंद्र, रक्त बैंक और वृद्धाश्रम बनाए जाएं।
सुरक्षा और आपदा प्रबंधन : CCTV नेटवर्क, स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल, महिला हेल्प डेस्क, फायर स्टेशन और आपदा राहत केंद्र स्थापित किए जाएं।
डिजिटल सेवाएँ : ऑनलाइन टैक्स भुगतान, शिकायत निवारण पोर्टल, ई-गवर्नेंस, सार्वजनिक वाई-फाई और सूचना बोर्ड स्थापित किए जाएं।
मनोरंजन और संस्कृति : ओपन जिम, योग पार्क, सामुदायिक हॉल, खेल स्टेडियम और सांस्कृतिक भवन बनाए जाएं।
तीन चरणों का रोडमैप (2025–2075)
पहला चरण (2025–2035) —
स्वास्थ्य और शिक्षा ढाँचे का नवीनीकरण किया जाए। जसोलधाम क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएँ विकसित की जाएं। वर्षाजल संचयन और सौर पैनलों की स्थापना की जाए। यातायात कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक हब स्थापित किए जाएं।
दूसरा चरण (2035–2050)
पर्यटन आधारित विकास को प्रोत्साहित किया जाए। कृषि प्रसंस्करण इकाइयाँ और ठोस अपशिष्ट रीसायक्लिंग उद्योग स्थापित किए जाएं। लघु उद्योग क्लस्टर और उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना की जाए।
तीसरा चरण (2050–2075)
जसोल को क्षेत्रीय आर्थिक केन्द्र का दर्जा दिया जाए। उच्च शिक्षा और रोजगार के अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित किए जाएं। पर्यावरण और धरोहर संरक्षण पर विशेष बल दिया जाए। ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्मार्ट नेटवर्क सुनिश्चित किया जाए।
नागरिकों की भूमिका
ग्राम और वार्ड स्तर पर समितियाँ बनाई जाएं, जो योजनाओं की निगरानी करें। महिला समूह, युवा स्टार्टअप और कृषक सहकारी संस्थाएँ सक्रिय भूमिका निभाएं। प्रत्येक परिवार वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता में योगदान दे।
वित्तीय और प्रशासनिक रणनीति
स्थानीय विकास के लिए सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) मॉडल अपनाया जाए। किसानों और उद्यमियों के लिए सहकारी बैंकों और माइक्रो–फाइनेंस की सुविधा दी जाए। राज्य और केंद्र सरकार से विशेष योजनाओं के लिए अनुदान प्राप्त किया जाए। ई–गवर्नेंस और प्रशासनिक पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाए।
संभावित जोखिम और समाधान
जल संकट से निपटने के लिए बहुस्तरीय जल प्रबंधन अपनाया जाए। पर्यावरणीय क्षरण रोकने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन और हरित पट्टी बनाई जाए। सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए धरोहर संरक्षण और पारंपरिक आयोजनों को बढ़ावा दिया जाए। आर्थिक असमानता को कम करने के लिए कौशल विकास और रोजगार योजनाएँ लागू की जाएं।
जसोल का भविष्य सामूहिक प्रयासों से साकार किया जाए। प्रत्येक नागरिक, व्यापारी, किसान और धार्मिक संगठन इसमें भागीदारी करें। जसोलधाम आस्था के केन्द्र साथ – साथ आर्थिक, सांस्कृतिक व सामाजिक समृद्धि का आधार भी बने।
यह 50-वर्षीय दृष्टि (2025–2075) जसोल को आत्मनिर्भर, सम्मानित और समृद्ध नगर के रूप में स्थापित करेगी। आने वाली पीढ़ियों के लिए एक गौरवशाली जसोल सौंपना सभी की साझा जिम्मेदारी है।
— कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोलप्रवक्ता एवं समिति सदस्य ,श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल

