बालोतरा पचपदरा। राजस्थान के औद्योगिक और आर्थिक भविष्य को नई दिशा देने वाली बालोतरा जिले की पचपदरा रिफाइनरी अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। वर्षों से जिस परियोजना का इंतजार किया जा रहा था, वह अब साकार होने जा रही है। रिफाइनरी का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और इसे लेकर जनवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित दौरे की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश सरकार ने रिफाइनरी के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से समय मांगा है। संकेत ऐसे मिल रहे हैं कि 10 जनवरी 2026 के आसपास प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान आ सकते हैं, जहां वे पचपदरा रिफाइनरी का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। यदि यह कार्यक्रम तय होता है, तो यह न सिर्फ बालोतरा बल्कि पूरे राजस्थान के लिए एक ऐतिहासिक दिन होगा।
वर्षों के इंतजार के बाद अब हकीकत बनती रिफाइनरी
पचपदरा रिफाइनरी परियोजना का सफर आसान नहीं रहा। इसकी परिकल्पना पहली बार वर्ष 2013 में की गई थी, लेकिन उस समय यह परियोजना धरातल पर उतरती नहीं दिख रही थी। वर्ष 2017 में नए सिरे से एमओयू हुआ और इसके बाद काम को गति मिली। हालांकि, तय समय सीमा अक्टूबर 2022 में परियोजना पूरी नहीं हो सकी और बाद में जून 2023 तक इसका समय बढ़ाया गया।
अब करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद यह परियोजना अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री जोगाराम पटेल ने स्पष्ट संकेत दिए कि रिफाइनरी का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और उद्घाटन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
9 एमएमटीपीए क्षमता की आधुनिक रिफाइनरी
पचपदरा में स्थापित यह रिफाइनरी 9 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) क्षमता वाली रिफाइनरी सह पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स है। यह परियोजना तकनीकी रूप से अत्याधुनिक मानी जा रही है, जो कच्चे तेल के परिष्करण के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
इस रिफाइनरी के चालू होने से राजस्थान को पहली बार एक ऐसा बड़ा औद्योगिक केंद्र मिलेगा, जो राज्य को ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

लागत में वृद्धि, लेकिन महत्व और बढ़ा
परियोजना की लागत को लेकर भी समय-समय पर बदलाव हुए हैं। शुरुआती अनुमान के अनुसार रिफाइनरी की लागत करीब 6,331 करोड़ रुपए थी, लेकिन निर्माण अवधि बढ़ने, तकनीकी बदलावों और अन्य कारणों से इसकी लागत में लगातार इजाफा हुआ।
सरकारी जानकारी के अनुसार, अब इस परियोजना की संशोधित कुल लागत लगभग 79,459 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। इसमें ऋण और इक्विटी का अनुपात पहले की तरह 2:1 रखा गया है। राज्य सरकार की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत तय की गई है, जिसके तहत सरकार को लगभग 6,886 करोड़ रुपए की इक्विटी देनी होगी। बढ़ी हुई लागत के कारण राज्य सरकार को अतिरिक्त 565.24 करोड़ रुपए अंश पूंजी के रूप में वहन करने होंगे।
जुलाई 2026 तक पेट्रोकेमिकल सेक्शन होगा चालू
रिफाइनरी परियोजना को दो चरणों में विकसित किया गया है। पहला चरण कच्चे तेल के परिष्करण से जुड़ा है, जबकि दूसरा चरण पेट्रोकेमिकल सेक्शन का है। अधिकारियों के अनुसार, पेट्रोकेमिकल सेक्शन 1 जुलाई 2026 तक पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगा।
इसके बाद पचपदरा रिफाइनरी न केवल ईंधन उत्पादन का केंद्र होगी, बल्कि प्लास्टिक, पॉलिमर और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण में भी बड़ी भूमिका निभाएगी।
हजारों रोजगार और क्षेत्रीय विकास की उम्मीद

पचपदरा रिफाइनरी को राजस्थान के लिए आर्थिक गेमचेंजर माना जा रहा है। इसके चालू होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। स्थानीय युवाओं को तकनीकी और गैर-तकनीकी क्षेत्रों में अवसर मिलेंगे, जिससे बालोतरा और आसपास के इलाकों की आर्थिक तस्वीर बदलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही सड़क, बिजली, पानी, लॉजिस्टिक्स और छोटे-बड़े उद्योगों के विकास को भी नई गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि रिफाइनरी के कारण पश्चिमी राजस्थान में औद्योगिक निवेश का नया दौर शुरू होगा।
राजस्थान के लिए गौरव का क्षण
मंत्री जोगाराम पटेल सहित कई जनप्रतिनिधियों ने इसे राजस्थान के लिए गौरव का क्षण बताया है। उनका कहना है कि पचपदरा रिफाइनरी न सिर्फ राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी, बल्कि राजस्थान को राष्ट्रीय औद्योगिक मानचित्र पर एक नई पहचान भी दिलाएगी।
अब सभी की निगाहें प्रधानमंत्री के संभावित दौरे और आधिकारिक उद्घाटन तिथि पर टिकी हुई हैं। यदि तय कार्यक्रम के अनुसार जनवरी 2026 में उद्घाटन होता है, तो यह दिन पचपदरा और राजस्थान के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगा।

