कच्छी घोड़ी, मयूर नृत्य व ढोल-नगाड़ों के साथ निकली शोभायात्रा, ग्रामीण संस्कृति से सजा हाट बाजार
बालोतरा। प्रदेश के प्राचीन और प्रसिद्ध पशु मेलों में शुमार श्री मल्लीनाथ पशु मेला तिलवाड़ा का रविवार को विधिवत शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ हुआ। मेले के उद्घाटन अवसर पर मेला मैदान में उत्साह और उमंग का माहौल देखने को मिला। युवाओं के साथ बड़ी संख्या में बुजुर्गों और ग्रामीणों की उपस्थिति से सजे हाट-बाजार ने पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति की झलक प्रस्तुत की।
उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री कृष्ण कुमार विश्नोई तथा जिला कलक्टर सुशील कुमार यादव ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मेले के ध्वज का ध्वजारोहण किया। पशुपालन विभाग की ओर से आयोजित इस मेले में पशुपालक, व्यापारी और मेलार्थी जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचे।

रविवार दोपहर लगभग 12.15 बजे राज्यमंत्री कृष्ण कुमार विश्नोई के मेला परिसर पहुंचने पर उन्हें मार्च पास्ट की सलामी दी गई। इसके बाद मेलार्थी डाक बंगले से पारंपरिक वाद्ययंत्रों और लोकनृत्यों के साथ शोभायात्रा लेकर मेला मैदान की ओर रवाना हुए। शोभायात्रा में कच्छी घोड़ी, मयूर नृत्य, ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे की धुनों ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

शोभायात्रा के साथ मेला ध्वज को ध्वजारोहण स्थल तक लाया गया, जहां पंडित जोगराज दवे के मंत्रोच्चार के बीच राज्यमंत्री कृष्ण कुमार विश्नोई और जिला कलक्टर श्री सुशील कुमार यादव ने ध्वजारोहण किया। इस दौरान उपस्थित ग्रामीणों और मेलार्थियों ने श्री मल्लीनाथ जी महाराज के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मेला मैदान में लगे हाट-बाजार में ग्रामीण जीवन से जुड़ी वस्तुओं, हस्तशिल्प, पारंपरिक खानपान और विभिन्न दुकानों की सजावट ने लोगों को आकर्षित किया। पशुपालकों द्वारा विभिन्न नस्लों के पशुओं को लेकर आने का क्रम भी शुरू हो गया है, जिससे आगामी दिनों में मेला और अधिक रौनकदार होने की संभावना है। मेले के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पशु प्रतियोगिताओं और व्यापारिक गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ ग्रामीण संस्कृति को भी नई पहचान मिलेगी।

इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री कृष्ण कुमार विश्नोई ने अपने संबोधन में कहा कि यह मेला न केवल पशुपालन की परंपरा को जीवित रखने का एक माध्यम है, बल्कि मारवाड़ी संस्कृति की जड़ों से जुड़ने का एक बड़ा अवसर भी बनकर उभरा है। विश्व विख्यात मालानी नस्ल के घोड़े इस मेले की मुख्य पहचान हैं। यह मेला न केवल व्यापार का केंद्र है, बल्कि किसानों और पशुपालकों की लंबी सोच और मेहनत का परिणाम है। उन्होने कहा कि हम गाय और भैंस का पालन तो कर रहे हैं, लेकिन रेगिस्तान के जहाज ऊंट को भूलते जा रहे हैं। उन्होने होली और दिवाली जैसे त्यौहारों पर घर के बाहर सजे हुए ऊंटों की परंपरा को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया। उन्होने कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण सुझाव प्रशासन के समक्ष रखा गया कि भविष्य में मेले की शुरुआत श्री मल्लीनाथ जी के मंदिर में माथा टेकने के साथ हो। मेले की शुरुआत धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए की जाए। संबोधन के अंत में मल्लीनाथ जी महाराज से प्रार्थना की गई कि आने वाला समय पूरे प्रदेश के लिए खुशहाली और बेहतर जमाना लेकर आए।

पूर्व राजस्व मंत्री अमराराम चौधरी ने मेलार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि श्री मल्लीनाथ पशु मेला बालोतरा जिले की पहचान बन गया है। इस ऐतिहासिक धरोहर को हमे सहेज कर रखना है। इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों से व्यापारी अपने पशुधन को बेचने और खरीदने के लिए आते है। उन्होंने कहा कि इस बार मेले से होने वाली आय को मेले की आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर खर्च किया जाएगा।

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक रमेश, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकरी हीराराम कलबी, अतिरिक्त जिला कलक्टर भुवनेश्वर सिंह चौहान, उपखंड अधिकारी अशोक कुमार, पचपदरा तहसीलदार गोपीकिशन पालीवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष भरत मोदी, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य हरिशचंद्र सिंह, स्थनीय जनप्रतिनिधि, उद्योगपति, व्यापारी, पशुपालन विभाग जोधपुर के अतिरिक्त निदेशक डॉ. मनमोहन नागौरी, संयुक्त निदेशक डॉ. नारायण सिंह सोलंकी, उप निदेशक डॉ. मदन गिरी, व्याख्याता डॉ. रामेश्वरी चौधरी एवं मेलार्थी उपस्थित रहे।
राज्यमंत्री कृष्ण कुमार विश्नोई ने मेला परिसर का किया भ्रमण

श्री मल्लीनाथ पशु मेला तिलवाड़ा के उद्घाटन कार्यक्रम के पश्चात उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री कृष्ण कुमार विश्नोई तथा जिला कलक्टर सुशील कुमार यादव ने मेला परिसर का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान राज्यमंत्री ने विभिन्न हाट-बाजार की दुकानों और व्यवस्थाओं का अवलोकन किया तथा मेलार्थियों से संवाद भी किया। इस दौरान उन्होंने श्री मल्लीनाथ जी के प्रसाद के रूप में भुने चने और मखाना चखा तथा अपने साथ मौजूद कार्यकर्ताओं और उपस्थित लोगों को भी प्रसाद वितरित किया। मेला परिसर में बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने भी प्रसाद ग्रहण कर मेले की परंपरा और आस्था में भागीदारी निभाई।
