SIKAR लक्खी फाल्गुनी मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब: खाटूश्यामजी धाम में गूंजे ‘शीश के दानी’ के जयकारे

BHAWANI SINGH
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आस्था और अनुशासन का संगम

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित आस्था का प्रमुख केंद्र खाटूश्यामजी मंदिर इन दिनों “हारे के सहारे” बाबा श्याम के जयकारों से गूंज रहा है। आठ दिवसीय वार्षिक लक्खी फाल्गुनी मेले के दूसरे दिन ही यहां श्रद्धा का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा धाम भक्तिमय वातावरण में डूब गया। देश के कोने-कोने से पहुंचे लाखों श्रद्धालु बाबा श्याम के दर्शन के लिए घंटों कतारों में खड़े नजर आए, लेकिन उनके चेहरों पर थकान नहीं, बल्कि आस्था और उत्साह साफ झलक रहा था।

पदयात्रियों का उत्साह देखते ही बना

रींगस से खाटू तक की पदयात्रा इस मेले की विशेष पहचान है। इस बार भी हजारों श्याम भक्त ढोल-चंग की थाप पर नाचते-गाते, गुलाल उड़ाते और हाथों में निशान लेकर बाबा के दरबार की ओर बढ़ते दिखाई दिए। “श्याम तेरी बंसी पुकारे” और “शीश के दानी की जय” जैसे जयकारों से रास्ते गूंज उठे। कई भक्त समूहों ने पारंपरिक वेशभूषा में यात्रा की, तो कुछ युवा टोली बनाकर भजन-कीर्तन करते हुए पहुंचे।

एकादशी को भरेगा मुख्य मेला

मेला अपने चरम पर फाल्गुन शुक्ल एकादशी, 27 फरवरी को पहुंचेगा। इसे लेकर श्री श्याम मंदिर कमेटी ने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र को आकर्षक रोशनी और रंग-बिरंगी सजावट से सुसज्जित किया है। मंदिर की विशेष फूलों की सजावट और विद्युत झालरों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया है। श्रद्धालु परिवार सहित पहुंचकर मत्था टेक रहे हैं और अपनी मनोकामनाओं के पूर्ण होने की कामना कर रहे हैं।

प्रशासन की मुस्तैदी से सुगम दर्शन

इस बार प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन में कई नवाचार किए हैं। अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग, बेहतर बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी और मेडिकल सहायता केंद्रों की व्यवस्था से दर्शन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और तेज हुई है। जिला कलेक्टर मुकुल शर्मा और पुलिस अधीक्षक प्रवीण नायक नूनावत लगातार व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मेला मजिस्ट्रेट मोनिका सामोर ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें तैनात हैं।

बाजारों में दिखी रौनक

मेले के चलते खाटू कस्बे के बाजारों में भी खास चहल-पहल है। प्रसाद, चुनरी, निशान, श्याम ध्वज और धार्मिक वस्तुओं की दुकानों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। स्थानीय व्यापारियों के लिए यह मेला साल का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। होटल, धर्मशालाएं और अस्थायी ठहराव स्थल पूरी तरह भरे हुए हैं।

सेवा भाव से सजे भंडारे

पदयात्रियों और दूर-दराज से आए भक्तों की सेवा के लिए जगह-जगह भंडारों की व्यवस्था की गई है। समाजसेवी संस्थाएं और स्थानीय लोग निःशुल्क भोजन, चाय, पानी और चिकित्सा सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं के पैरों की मालिश और प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था की गई है, जिससे यात्रा की थकान कम हो सके।

आस्था और अनुशासन का संगम

लक्खी फाल्गुनी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और सामाजिक समरसता का संगम है। लाखों की भीड़ के बावजूद अनुशासन और सहयोग की भावना देखने को मिल रही है। हर भक्त की आंखों में एक ही विश्वास झलकता है “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा।”

आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। प्रशासन और मंदिर समिति दोनों ही इस महाआयोजन को शांतिपूर्ण और भव्य बनाने में जुटे हैं, ताकि देशभर से आने वाले भक्त अपने आराध्य के दर्शन कर संतोष और आशीर्वाद लेकर लौट सकें।

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