तिलवाड़ा बालोतरा। श्री राणी रूपादे जी मंदिर (पालिया) प्राण-प्रतिष्ठा का आठवाँ वार्षिक पाटोत्सव अत्यंत दिव्यता, भव्यता और सांस्कृतिक गरिमा के साथ ऐतिहासिक रूप से सम्पन्न हुआ। दो दिवसीय इस अद्वितीय आयोजन में धर्म, लोक-संस्कृति, सामाजिक समरसता, सनातन परंपराएँ, नारी-सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण एवं समाज जागरण का अप्रतिम संगम देखने को मिला। क्षेत्रभर से उमड़े श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति ने इस महोत्सव को असाधारण गरिमा प्रदान की।
पाटोत्सव के उपलक्ष्य में श्री राणी रूपादे जी मंदिर (पालिया), श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर (मालाजाल) तथा श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर (तिलवाड़ा-थान मल्लीनाथ) — इन तीनों पवित्र धामों को विविध रंगों की रोशनियों, पुष्प-तोरणों, पुष्प-वर्षा, दीप-स्तंभों, पारंपरिक कलात्मक सजावट, सुगंधित फूलों और अलंकृत श्रृंगार से अभूतपूर्व ढंग से सजाया गया। रात्रि में तीनों मंदिरों की प्रकाशमय छटा चारों ओर दिव्य आभा बिखेर रही थी। श्रद्धालु इस सौंदर्य, भक्ति और शांति के अद्भुत वातावरण में आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करते रहे।
विशेष संयोग : अयोध्या श्री राम मंदिर में आज सम्पन्न ऐतिहासिक अनुष्ठान
आज का यह पावन दिवस एक अत्यंत दिव्य एवं राष्ट्रीय महत्व के विशेष संयोग का साक्षी बना। मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी के शुभ अवसर पर अयोध्या में श्री राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा का ध्वजारोहण औपचारिक रूप से सम्पन्न हुआ, जो आज के दिवस के आध्यात्मिक महत्व को और अधिक उजागर करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पावन उपस्थिति में अभिजीत मुहूर्त के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह पवित्र अनुष्ठान सम्पन्न किया गया। ध्वजारोहण के साथ राम मंदिर निर्माण प्रक्रिया की पूर्णता के संदेश को भी औपचारिक स्वरूप प्राप्त हुआ। पालिया पाटोत्सव का दिव्य समारोह और अयोध्या धाम में संपन्न यह ऐतिहासिक ध्वजारोहण—दोनों मिलकर आज के दिवस को राष्ट्रीय सनातन चेतना, आस्था, परंपरा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा की एक गौरवपूर्ण श्रृंखला में जोड़ते हैं।
पूर्व संध्या : भक्तिमय राती जोगा
पाटोत्सव की पूर्व संध्या पर 24 नवम्बर 2025 को पारंपरिक राती जोगा का आयोजन हुआ। स्थानीय दमामियों एवं दामामणियों द्वारा प्रस्तुत विविध भक्ति-भजन, लोक भजन, ढोल-थाली और सांस्कृतिक धुनों ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। रातभर मंदिर परिसर में भजनों की दिव्य गूँज प्रतिध्वनित होती रही और श्रद्धालु भक्ति एवं आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते रहे। इस राती जोगा ने पाटोत्सव के मुख्य दिवस के लिए पूरे क्षेत्र का वातावरण अलौकिक और उत्सवमय बना दिया।
मुख्य दिवस का शुभारंभ : वैदिक पूजा-अर्चना एवं अनुष्ठान

25 नवम्बर 2025 की प्रभात बेला में मंगला आरती के साथ मुख्य दिवस का शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात श्री गणपति पूजन, मातृका पूजन, नवग्रह पूजन एवं वैदिक हवन का आयोजन शास्त्रोक्त विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ। विद्वान आचार्यों, वैदिक ब्राह्मणों एवं आचार्य-मंडल द्वारा उच्चारित वेदमंत्रों ने सम्पूर्ण परिसर को दिव्य ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। हवन-कुंड की पवित्र सुगंध और अनुष्ठानों की गंभीरता से वातावरण में शांत, पावन और सौम्य ऊर्जा का संचार हुआ।
इस दौरान तीनों मंदिरों में संस्थान सचिव सुमेर सिंह वरिया द्वारा समस्त भक्तजन की ओर से महाप्रसादी भोग अर्पित किया गया। दमामियों की ढोल-थाली की पारंपरिक ध्वनि एवं गैर नृत्य की कलाकृति, मंदिरों की अलंकारिक सजावट और वैदिक अनुष्ठानों का समन्वय पाटोत्सव की आध्यात्मिक भव्यता को शिखर पर ले गया।
इको-फेमिनिज़्म आधारित अभिनव कार्यक्रम : “बेटी और प्रकृति का पवित्र संगम” इस वर्ष पाटोत्सव का सबसे अद्वितीय और समाज-जागरण का केंद्र बिंदु रहा—इको-फेमिनिज़्म पर आधारित ‘‘बेटी और प्रकृति का पवित्र संगम’’ कार्यक्रम। इस विशेष पहल के अंतर्गत तिलवाड़ा एवं थान मल्लीनाथ ग्राम पंचायत क्षेत्र की विभिन्न बस्तियों की कुल 32 नवजात बालिकाओं द्वारा वृक्षारोपण कराया गया। यह एक अत्यंत अनोखी परंपरा की शुरुआत रही, जिसमें बालिका को प्रकृति-संरक्षण एवं सृजन का प्रतीक मानकर ‘‘एक बालिका—एक वृक्ष’’ का शुभ संस्कार कराया गया।
इको-फेमिनिज़्म की भावना यह है कि नारी और प्रकृति दोनों सृजन, करुणा, संरक्षण और संतुलन की समान शक्ति हैं। यह कार्यक्रम समाज में यह संदेश देने वाला सिद्ध हुआ कि बेटी केवल परिवार ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण धरती के भविष्य का आधार है। नवजात बालिकाओं द्वारा वृक्षारोपण का यह दृश्य पूरे पाटोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी क्षण रहा। रावल किशन सिंह जसोल के मार्गदर्शी विचार
मुख्य कार्यक्रम में संबोधित करते हुए संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने श्री राणी रूपादे जी और श्री रावल मल्लीनाथ जी के जीवन-चरित्र और उपदेशों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रावल श्री मल्लीनाथ जी सत्य, निष्ठा, धर्मपालन और न्याय के आदर्श हैं, वहीं श्री राणी रूपादे जी नारी-सम्मान, सेवा, करुणा और त्याग की जीवंत प्रतिमा हैं।
उन्होंने आगे कहा— “प्रकृति और शक्ति का संबंध आदिकाल से है। प्रकृति सृजन की जननी है और शक्ति उस सृजन का संरक्षण और संतुलन बनाए रखने वाली ऊर्जा है। जब प्रकृति, नारी और समाज एक सूत्र में बंधते हैं, तभी संस्कृति और मानव जीवन स्थिरता एवं समृद्धि की ओर अग्रसर होते हैं।”

उन्होंने इको-फेमिनिज़्म आधारित वृक्षारोपण को दोनों महापुरुषों के जीवन-दर्शन का आधुनिक रूप बताते हुए कहा कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों में संवेदना, नारी-समानता और पर्यावरण-प्रेम का स्थायी संस्कार रोपेगी।
जिला एवं विधिक सेवा प्राधिकरण, बालोतरा का सहयोग और प्रशंसा
जिला एवं विधिक सेवा प्राधिकरण, बालोतरा के सचिव सिद्धार्थ दीप ने रावल किशन सिंह जसोल के मार्गदर्शन में तीनों मंदिर परिसरों एवं आसपास के क्षेत्रों में किए गए वृक्षारोपण को समाजहित में अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की यह प्रक्रिया न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना को भी जागृत करती है।
पूर्व विधायक शैतान सिंह का प्रेरक उद्बोधन
समिति सदस्य एवं पोकरण के पूर्व विधायक शैतान सिंह ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि यह क्षेत्र सौभाग्यशाली है कि यहां रावल किशन सिंह जसोल जैसे महापुरुष समाज को एकता, संस्कृति-संरक्षण और संगठन की दिशा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने सर्वसमाज की एकता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि लगभग 700 वर्ष पहले श्री रावल मल्लीनाथ जी और श्री राणी रूपादे जी ने जिस सामाजिक एकता को स्थापित किया था, उसी की पुनः पुनर्स्थापना आज अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने इतिहास-सुधार के मुद्दे पर कहा— “इतिहास में कई स्थानों पर गलत तथ्य लिख दिए गए हैं, जहाँ मुगलों को विजेता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यदि वास्तव में उनका राज होता, तो आज भी राजपूत शासकों के किले, धरोहरें और गौरव-चिह्न इतने स्वाभिमान के साथ सुरक्षित कैसे दिखाई देते?”
उन्होंने रावल किशन सिंह जसोल के विगत वर्षों पूर्व पालिया मंदिर परिसर में दिए गए विचारों का समर्थन करते हुए समाज से आह्वान किया कि इतिहास के विकृत स्वरूप को ठीक करवाने के लिए सभी को संगठित होकर प्रयासरत रहना चाहिए। ध्वज-पूजन, विशेष भोग अर्पण एवं ध्वजारोहण मुख्य कार्यक्रम उपरांत श्री श्री 1008 श्री नृत्य गोपाल राम जी महाराज (गढ़ सिवाना) के पावन सान्निध्य में ध्वज-पूजन एवं ध्वजारोहण अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ।
ध्वजारोहण से पूर्व संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल द्वारा विशेष प्रसादी का भोग वैदिक विधि से अर्पित किया गया, जिसमें समिति सदस्य कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल भी उपस्थित रहे। तत्पश्चात ध्वजारोहण रावल किशन सिंह जसोल के कर-कमलों से छत्तीसी कौम एवं सर्वसमाज की विशाल उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इसके उपरांत सभी श्रद्धालुओं में महाप्रसादी का वितरण किया गया।
यज्ञ-पूर्णाहुति एवं पाटोत्सव का समापन
कार्यक्रम के समापन के अवसर पर अंतिम श्रृंखला में वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य यज्ञ-पूर्णाहुति सम्पन्न हुई। सैकड़ों भक्तों ने दर्शन-लाभ, धर्म-लाभ और आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। यज्ञ-पूर्णाहुति के साथ यह पावन पाटोत्सव शांति, सामाजिक समरसता, नारी-समानता, पर्यावरण-सुरक्षा, सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण और सनातन संस्कृति की गौरवपूर्ण परंपराओं का संदेश देते हुए पूर्णतः सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
यह पाटोत्सव समाज में एकता, संस्कृति, प्रेरणा, जागृति और समन्वय का एक जीवंत और ऐतिहासिक माध्यम बनकर स्थापित हुआ।

