श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान एवं आर्ट ऑफ लिविंग के संयुक्त तत्वावधान में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अंश के प्राप्त होंगे दर्शन

Narpat Mali
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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अंश के प्राप्त होंगे दर्शन

बालोतरा जसोल। भारत की सनातन धार्मिक परंपरा, शाश्वत आध्यात्मिक चेतना तथा गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रसार के उद्देश्य से श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल में एक अत्यंत पावन, दिव्य एवं ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल एवं आर्ट ऑफ लिविंग के संयुक्त तत्वावधान में तथा उनके संस्थापक, विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर जी के मार्गदर्शन में संपन्न होगा। यह आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक जागरूकता एवं सनातन मूल्यों के विस्तार का सशक्त माध्यम सिद्ध होगा।

इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को लगभग एक हजार वर्ष प्राचीन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अंश के दर्शन का दुर्लभ एवं सौभाग्यपूर्ण अवसर प्राप्त होगा। धार्मिक एवं आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिव्य अंश प्राचीन काल से संत–महात्माओं एवं आचार्यों की परंपरागत देखरेख में श्रद्धा, सम्मान एवं विधिपूर्वक संरक्षित रहा है। यह पावन धरोहर युगों–युगों से शिवभक्ति, आध्यात्मिक चेतना एवं सनातन आस्था का उज्ज्वल प्रतीक मानी जाती रही है।

वर्तमान काल में इस दिव्य ज्योतिर्लिंग अंश को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ देश के विभिन्न प्रमुख धार्मिक एवं तीर्थ स्थलों पर प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे अधिकाधिक जनमानस इस पावन ऊर्जा का अनुभव कर आत्मिक शांति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति कर सके। इसी क्रम में यह ज्योतिर्लिंग अंश श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल में भी श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु पधार रहा है, जो जसोल क्षेत्र सहित समस्त शिव भक्तों के लिए अत्यंत गौरव एवं हर्ष का विषय है।

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श्री राणी भटियाणी मंदिर जसोल धाम

दिनांक 24 दिसम्बर 2025 को सायं 04:00 बजे से सायं 06:30 बजे तक श्रद्धालुजन जसोलधाम मंदिर प्रांगण में पवित्र, शांत एवं सुव्यवस्थित वातावरण में इस दिव्य ज्योतिर्लिंग अंश के दर्शन कर सकेंगे। मंदिर संस्थान द्वारा दर्शन व्यवस्था को सहज, सुचारु एवं गरिमामय बनाए रखने हेतु समस्त आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं, जिससे प्रत्येक श्रद्धालु श्रद्धा, शांति एवं संतोष के साथ दर्शन लाभ प्राप्त कर सके।

यह आयोजन सनातन संस्कृति की निरंतरता, आध्यात्मिक मूल्यों की सुदृढ़ता तथा सामाजिक समरसता का सजीव प्रतीक है। 

ऐसे पावन अवसर समाज में सकारात्मक चिंतन, आध्यात्मिक संतुलन एवं सांस्कृतिक चेतना को और अधिक सुदृढ़ करते हैं तथा नई पीढ़ी को अपनी आध्यात्मिक विरासत से आत्मीय रूप से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनते हैं।

श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल द्वारा समस्त क्षेत्रवासियों, श्रद्धालुओं, शिव भक्तों एवं धर्मप्रेमी जनों से सादर अनुरोध किया जाता है कि वे निर्धारित समय में पधारकर मंदिर की मर्यादा, शांति एवं पवित्र वातावरण का पालन करते हुए इस दिव्य, पावन एवं ऐतिहासिक अवसर पर दर्शन लाभ अवश्य प्राप्त करें।

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