राजस्थान के नवगठित बालोतरा जिला के सिणधरी उपखंड क्षेत्र के डंडाली गांव में रविवार देर शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। खेत में स्थित पानी की डिग्गी में गिरने से एक युवती की मौत हो गई। घटना के बाद गांव में मातम पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
शाम को पानी भरने गई थी, लौटकर नहीं आई
प्राप्त जानकारी के अनुसार डंडाली निवासी भागवती पुत्री चूनाराम मेघवाल रविवार शाम करीब 7 बजे खेत में बनी पानी की डिग्गी पर घरेलू उपयोग के लिए पानी भरने गई थी। ग्रामीणों के अनुसार खेतों में बनी ये डिग्गियां अक्सर गहरी होती हैं और उनमें सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होते। बताया जा रहा है कि पानी भरते समय उसका पैर फिसल गया और वह सीधे गहरे पानी में जा गिरी।
डिग्गी में पानी का स्तर काफी अधिक था और किनारों पर फिसलन होने के कारण वह बाहर निकलने का प्रयास नहीं कर सकी। आसपास मौजूद लोगों ने शोर सुनकर मौके पर पहुंचकर बचाव का प्रयास किया, लेकिन अंधेरा बढ़ने और पानी की गहराई ज्यादा होने के कारण वे सफल नहीं हो पाए।
रात में चला रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही बालोतरा से तैराकों की टीम को मौके पर बुलाया गया। ठंडे पानी, सीमित रोशनी और गहराई जैसी चुनौतियों के बावजूद रेस्क्यू अभियान तुरंत शुरू किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि रात के अंधेरे में मोबाइल टॉर्च और अस्थायी लाइट की व्यवस्था कर बचाव कार्य को जारी रखा गया।
करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद रात लगभग 11 बजे युवती के शव को डिग्गी से बाहर निकाला गया। इस अभियान में सिविल डिफेंस के जनक गहलोत, राजस्थान होमगार्ड के जवान गौतम गहलोत और स्थानीय तैराक गोपाल माली ने अहम भूमिका निभाई। ग्रामीणों ने टीम के प्रयासों की सराहना की, हालांकि सभी के चेहरे पर दुख साफ झलक रहा था।
गांव में पसरा मातम
जैसे ही शव को बाहर निकाला गया, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि भागवती मिलनसार स्वभाव की थी और परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाती थी। अचानक हुए इस हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
शव को सिणधरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मोर्चरी में रखवाया गया है। सोमवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सुरक्षा उपायों की उठी मांग
इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खेतों में बनी पानी की डिग्गियों के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उनका कहना है कि अधिकतर डिग्गियों के किनारों पर न तो रेलिंग होती है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए जाते हैं। रात के समय रोशनी की व्यवस्था भी नहीं होती, जिससे हादसों की आशंका बढ़ जाती है।
ग्रामीणों ने सुझाव दिया है कि डिग्गियों के चारों ओर मजबूत घेराबंदी, सीढ़ियों की सुरक्षित व्यवस्था और चेतावनी संकेत लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
यह हादसा एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी को उजागर करता है। प्रशासनिक स्तर पर यदि समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं, तो ऐसी दर्दनाक घटनाओं से बचा जा सकता है। फिलहाल डंडाली गांव शोक में डूबा है और हर कोई यही दुआ कर रहा है कि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दुख न झेलना पड़े।

